50 करोड़ लोगों तक पहुंचा डॉक्टर का फोन! मन की बात में पीएम ने बताए ये 3 बड़े बदलाव

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50 करोड़ लोगों तक पहुंचा डॉक्टर का फोन! मन की बात में पीएम ने बताए ये 3 बड़े बदलाव
फोटो: प्रतीकात्मक — टेलीमेडिसिन और मिलेट खेती की प्रतिनिधि तस्वीरें

देश में टेलीमेडिसिन ने एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले मुश्किल थी, और रविवार 25 अक्टूबर 2026 को प्रसारित ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी बदलाव की बड़ी तस्वीर सामने रखी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन पहल ई-संजीवनी टेलीकंसल्टेशन के जरिए अब तक करीब 50 करोड़ परामर्श पूरे हो चुके हैं, और यह आंकड़ा गांव से लेकर दूरदराज के द्वीपों तक स्वास्थ्य सेवा की पहुंच का सबूत है। दरअसल, यह सेवा उन इलाकों तक भी पहुंच रही है, जहां पहले विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलना कई दिन की यात्रा मांगता था।

ई-संजीवनी टेलीकंसल्टेशन ने कैसे बदली तस्वीर

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले एक मामूली डॉक्टर विजिट में भी काफी समय लग जाता था, लेकिन अब करीब 1.9 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर पंचायत स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा दे रहे हैं। इसके बाद उन्होंने बताया कि ये आरोग्य मंदिर अब स्थानीय वेलनेस केंद्रों के रूप में विकसित हो रहे हैं, जहां ग्रामीणों को नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिल रही है। इसी वजह से ई-संजीवनी स्वास्थ्य व्यवस्था की एक मजबूत कड़ी बन गई है, क्योंकि दूरदराज के मरीज भी अब विशेषज्ञ सलाह ले पा रहे हैं।

इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी इस उपलब्धि को रेखांकित किया, और उन्होंने अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, लद्दाख और नगालैंड जैसे इलाकों का जिक्र किया। दरअसल, इन जगहों पर पहले विशेषज्ञ परामर्श के लिए लंबी यात्रा करनी पड़ती थी, लेकिन अब एक फोन स्क्रीन के जरिए ही सलाह मिल जाती है।

इस एपिसोड में विज्ञान और खेती की भी बड़ी कहानियां सामने आईं, जिसमें आईआईटी मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर की विश्व में पहली तरह की मानव मस्तिष्क की 3डी मैपिंग का जिक्र हुआ। इसके अलावा, मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स के खंडुली गांव में दो दोस्तों ने मिलेट की खेती को कुकीज, केक, मफिन और बेबी फूड जैसे उत्पादों में बदलकर नई जान दी। प्रधानमंत्री ने पूर्णिया के मखाने के ग्रीस पहुंचने और कलबुर्गी की दालों के मालदीव पहुंचने का उदाहरण भी दिया, और त्योहारों में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की।

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अब सवाल यह है कि टेलीमेडिसिन का यह सफर आगे कितना और फैलेगा, क्योंकि 50 करोड़ का आंकड़ा एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। हालांकि इस एपिसोड ने यह साफ कर दिया है कि स्वास्थ्य, विज्ञान और पारंपरिक खेती जैसे अलग-अलग क्षेत्र एक साथ आगे बढ़ रहे हैं, आने वाले समय में ई-संजीवनी का नेटवर्क और मजबूत होगा, तो गांव के मरीज को भी शहर जैसी सलाह घर के पास मिल सकेगी। स्रोत: ET Now (ANI inputs)

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