1,250 लोगों ने एक साथ चलकर दिया ये बड़ा संदेश! चेन्नई की Pink Walk में छिपा है हर महिला के लिए जरूरी सबक — जानें क्या

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1,250 लोगों ने एक साथ चलकर दिया ये बड़ा संदेश! चेन्नई की Pink Walk में छिपा है हर महिला के लिए जरूरी सबक — जानें क्या
कोलाज: वॉकथॉन की प्रतिनिधि फोटो (3-Day / PHMF) — अपोलो Pink Walk ’26, चेन्नई की खबर के लिए प्रतिनिधि छवि।

चेन्नई में शनिवार 24 अक्टूबर को आयोजित Pink Walk स्तन कैंसर जागरूकता अभियान ने हजारों लोगों का ध्यान खींच लिया। अपोलो स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स, वनगरम की ओर से आयोजित इस वॉक में करीब 1,250 लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें आम लोग, स्वास्थ्य कर्मी और समर्थक शामिल थे। हालांकि यह एक वॉक थी, लेकिन इसका संदेश सीधा था कि स्तन कैंसर के बारे में समय पर बात करना और शुरुआती जांच कराना जान बचा सकता है। अक्टूबर स्तन कैंसर जागरूकता माह है, और इसी कड़ी में यह वॉक हुई थी।

इस वॉक को थिरुवेरकाडु नगरपालिका के अध्यक्ष एन. ई. के. मूर्ति ने अस्पताल परिसर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। वहीं, प्रतिभागी वनगरम से चलकर वेलाप्पनचावडी के श्री गजलक्ष्मी कल्याण मंडपम पहुंचे, जहां कैंसर विशेषज्ञों और सामुदायिक कार्यकर्ताओं ने लोगों से जागरूकता और शुरुआती जांच को लेकर बातचीत की। इसके बाद अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि बेहतर इलाज तक पहुंच के साथ-साथ समय पर कार्रवाई और सामुदायिक भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।

Pink Walk स्तन कैंसर जागरूकता: भारत में हालात क्या हैं

भारत में स्तन कैंसर का बोझ लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अनुमान के मुताबिक 2025 में महिलाओं में करीब 2.39 लाख नए मामले सामने आने का अनुमान था। वहीं, स्तन कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसर माना जाता है, इसलिए जागरूकता की कमी कई बार इलाज में देरी की वजह बन जाती है। दरअसल, शुरुआती चरण में पकड़े जाने पर इलाज के विकल्प ज्यादा और बेहतर होते हैं, जबकि देर होने पर बीमारी और इलाज दोनों मुश्किल हो जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को अपने शरीर में किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और शंका होने पर बिना झिझक डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। वहीं, परिवार के सदस्यों की भूमिका भी अहम है, क्योंकि कई बार महिलाएं दूसरों की सेहत को अपनी सेहत से ऊपर रख देती हैं और अपनी जांच टाल देती हैं। इसके अलावा नियमित जांच, सही जानकारी और खुलकर बातचीत इस बीमारी से जुड़े डर और भ्रम को कम कर सकती है। विटामिन D और दिमाग पर हालिया स्टडी की पूरी खबर यहां पढ़ें।

चेन्नई की यह वॉक इसलिए भी खास रही, क्योंकि इसमें सिर्फ अस्पताल के लोग ही नहीं, बल्कि आम नागरिक भी बड़ी संख्या में शामिल हुए और स्वास्थ्य को लेकर सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। हालांकि एक वॉक से बीमारी खत्म नहीं होती है, लेकिन इस तरह के आयोजन लोगों को जांच के लिए प्रेरित करते हैं और जागरूकता को घर-घर तक पहुंचाते हैं। उम्मीद है कि ज्यादा महिलाएं समय पर जांच कराएंगी। (स्रोत: द हिंदू)

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