पहला गेम जीतकर भी हार गईं सिंधु! जानें फ्रेंच ओपन फाइनल में कहां पलट गया मैच

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पहला गेम जीतकर भी हार गईं सिंधु! जानें फ्रेंच ओपन फाइनल में कहां पलट गया मैच
फोटो क्रेडिट: मायखेल / कोरिया जोंगआंग डेली (प्रेस फोटो)। कोलाज: TheFocusWorld

पेरिस में रविवार 25 अक्टूबर को खेले गए फ्रेंच ओपन के महिला सिंगल्स फाइनल में पीवी सिंधु फ्रेंच ओपन का खिताब जीतने से चूक गईं। दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी अन से यंग के खिलाफ उन्होंने पहला गेम जीतकर उम्मीदें जगा दी थीं, हालांकि इसके बाद मुकाबला पूरी तरह पलट गया। करीब 61 मिनट चले इस फाइनल में सिंधु को 21-16, 11-21, 12-21 से हार का सामना करना पड़ा। यह टूर्नामेंट पेरिस के एरीना ग्रैंड पेरिस में खेला गया और इसकी इनामी राशि 9,50,000 डॉलर थी।

शुरुआत में सिंधु ने अपनी लंबाई और आक्रामक खेल का पूरा फायदा उठाया। दोनों खिलाड़ियों के बीच शुरुआती दौर में नेट पर कई रोमांचक रैलियां देखने को मिलीं और स्कोर कुछ देर तक बराबरी पर चलता रहा। इसके बाद सिंधु ने स्मैश और कोर्ट कवरेज से बढ़त बनाई और पहला गेम 20 मिनट में 21-16 से अपने नाम कर लिया। यह सिर्फ दूसरा मौका था जब सिंधु ने अन से यंग के खिलाफ किसी मुकाबले में एक गेम जीता हो।

पीवी सिंधु फ्रेंच ओपन फाइनल में कहां से पिछड़ीं

दूसरे गेम में अन से यंग ने अपनी निरंतरता और डिफेंस से मैच का रुख बदल दिया। शुरुआती दौर में मुकाबला बराबरी पर था, लेकिन इसके बाद कोरियाई खिलाड़ी ने लगातार अंक बटोरकर गेम 21-11 से जीत लिया। वहीं निर्णायक गेम में सिंधु ने 8-5 की बढ़त भी बनाई, दरअसल यहीं से मैच का सबसे बड़ा मोड़ आया। अन से यंग ने स्कोर 11-9 तक पलट दिया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा, अंत में उन्होंने तीसरा गेम 21-12 से जीतकर खिताब अपने नाम किया।

इस हार के साथ अन से यंग के खिलाफ सिंधु का रिकॉर्ड 0-11 हो गया है। हालांकि इस फाइनल तक पहुंचना भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह इस सीजन का उनका दूसरा सुपर 750 फाइनल था। इससे पहले उन्होंने जुलाई में जापान ओपन का खिताब जीता था और सेमीफाइनल में जापान की हिना अकेतची को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। अन से यंग के लिए यह चौथा फ्रेंच ओपन खिताब और इस सीजन का 11वां खिताब रहा।

मैच के बाद सिंधु ने कहा कि शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ हर अंक के लिए पूरी ताकत से लड़ना होता है। उन्होंने माना कि पहले गेम की जीत के बाद भी लय बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन इस प्रदर्शन से कई सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। सिंधु के मुताबिक अभी सुधार की काफी गुंजाइश बाकी है और वह आने वाले टूर्नामेंटों में और बेहतर बैडमिंटन खेलना चाहती हैं। भारतीय फैंस के लिए यह फाइनल निराशा के साथ एक उम्मीद भी है कि सिंधु फिर बड़ी जीत की दहलीज पर खड़ी हैं।

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