मेनोपॉज़ धीरे-धीरे नहीं, एक झटके में आता है! 10 लाख महिलाओं की रिसर्च में बड़ा खुलासा — जानिए क्या

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मेनोपॉज़ धीरे-धीरे नहीं, एक झटके में आता है! 10 लाख महिलाओं की रिसर्च में बड़ा खुलासा — जानिए क्या
इज़रायल के वाइज़मैन इंस्टीट्यूट की रिसर्च में रजोनिवृत्ति के समय शरीर में अचानक बदलावों का खुलासा। फोटो क्रेडिट: HealthShots / bensmainelab.com (कॉलाज: TheFocusWorld)

महिलाओं की सेहत को लेकर अब तक की सबसे पुरानी धारणा ध्वस्त हो गई है। ताज़ा मेनोपॉज़ अध्ययन के अनुसार रजोनिवृत्ति कोई धीमी और क्रमिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आखिरी मासिक धर्म के समय शरीर में अचानक बड़े बदलाव आते हैं। इज़रायल के वाइज़मैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के शोधकर्ताओं ने अमेरिका और इज़रायल की 10 लाख से अधिक महिलाओं के 30 करोड़ से ज़्यादा लैब टेस्ट परिणामों का विश्लेषण किया है। यह अध्ययन इस सप्ताह प्रतिष्ठित जर्नल नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।

शोध में सामने आया कि 90 तरह के लैब टेस्ट में से 52 में आखिरी पीरियड के समय सीढ़ी जैसी अचानक छलांग दिखी। ये बदलाव सिर्फ हार्मोन के उतार-चढ़ाव या प्रजनन क्षमता तक सीमित नहीं थे, बल्कि हड्डियों की सेहत, लिवर और किडनी की कार्यप्रणाली तथा कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर भी गहरा असर पड़ा। एक और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि सेक्स हार्मोन में बदलाव रजोनिवृत्ति से दस साल पहले ही तेज़ होने लगते हैं, जो अब तक के अनुमानों से कई साल पहले है। वहीं, मेनोपॉज़ल हार्मोन थेरेपी लेने वाली महिलाओं में ये बदलाव अपेक्षाकृत कम दर्ज किए गए।

मेनोपॉज़ अध्ययन का सबसे बड़ा खुलासा

रजोनिवृत्ति पर शोध के लिए इतना बड़ा डेटा चुनना आसान नहीं था, क्योंकि आमतौर पर इन रिकॉर्ड में आखिरी पीरियड की सही उम्र का पता नहीं चलता। इस दिक्कत से निपटने के लिए शोधकर्ताओं ने खगोल विज्ञान से प्रेरित एक नई गणन विधि विकसित की, जिससे आंकड़ों की धुंधली परत साफ हो गई। टीम ने अमेरिकी नेशनल हेल्थ सर्वे के दो दशकों के डेटा और इज़रायल के क्लालिट स्वास्थ्य बीमा के करीब 20 साल के मेडिकल रिकॉर्ड का मिलान किया। शोध का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर उरी अलोन ने कहा कि यह अध्ययन मेनोपॉज़ से करीब दस साल पहले ही एहतियाती देखभाल का दरवाज़ा खोलता है।

महिलाओं के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि इन अचानक बदलावों का संबंध बीमारियों के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है। शोधकर्ताओं की सलाह है कि रजोनिवृत्ति से कई साल पहले ही नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और हड्डी-कोलेस्ट्रॉल की जांच पर ध्यान दिया जाए। रोज़ के खान-पान का कोलेस्ट्रॉल पर पड़ने वाले असर पर हमारी यह रिपोर्ट भी पढ़ें। हालांकि, यह शोध पर्यवेक्षणात्मक था, इसलिए यह साबित नहीं करता कि हर बदलाव की जड़ में मेनोपॉज़ ही है।

कुल मिलाकर, यह शोध महिलाओं के स्वास्थ्य को समझने में एक बड़ी छलांग है। अब तक मेनोपॉज़ को सिर्फ प्रजनन से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन नए निष्कर्ष बताते हैं कि यह पूरे शरीर की एक बड़ी जैविक घड़ी है। हर महिला का अनुभव अलग हो सकता है, इसलिए अपने लक्षणों पर डॉक्टर से समय पर बात करना सबसे समझदारी का कदम है। अध्ययन की विस्तृत जानकारी यहां पढ़ें।

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