हफ्ते में सिर्फ 1 एनर्जी ड्रिंक! 9,632 बच्चों की रिसर्च में दिमाग पर चौंकाने वाला असर — जानिए क्या खुला

·

हफ्ते में सिर्फ 1 एनर्जी ड्रिंक! 9,632 बच्चों की रिसर्च में दिमाग पर चौंकाने वाला असर — जानिए क्या खुला
एनर्जी ड्रिंक के कैन और ठंडा पेय पीता बच्चा। नई रिसर्च में बच्चों के दिमाग और नींद पर कैफीन के असर का खुलासा हुआ है। (फोटो स्रोत: ऑपरेशंसस्पोर्ट्स / न्यूज़-मेडिकल.नेट)

नई रिसर्च ने माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है — बच्चों के लिए एनर्जी ड्रिंक या कैफीन वाले ठंडे पेय हफ्ते में सिर्फ एक बार भी बच्चों के दिमाग पर असर डाल सकते हैं। लंदन के किंग्स कॉलेज के वैज्ञानिकों ने 9 से 11 साल के 9,632 अमेरिकी बच्चों के MRI स्कैन के आंकड़ों का विश्लेषण किया। यह अमेरिका की ABCD स्टडी से जुड़े बच्चों पर किया गया अध्ययन था, जिसमें करीब 18 महीनों तक दिमाग के विकास पर नज़र रखी गई।

शोध में पाया गया कि जो बच्चे ज्यादा कैफीन लेते थे, उनके दिमाग की बाहरी परत यानी कॉर्टेक्स का सतही क्षेत्रफल कम था। यह अंतर दिमाग के 22 अलग-अलग हिस्सों में दिखा, जो दिमाग के चारों लोब में फैला था। सबसे ज्यादा कैफीन सॉफ्ट ड्रिंक्स से मिल रही थी, और बिना कैफीन वाले बच्चों की तुलना में हफ्ते में सिर्फ एक पेय से भी फर्क नजर आने लगा। हालांकि यह भी ध्यान रखना होगा कि ये अंतर छोटे थे और इन्हें सामान्य विकास के दायरे में ही दर्ज किया गया।

बच्चों के लिए एनर्जी ड्रिंक: नींद और मानसिक सेहत पर असर

नींद पर असर सबसे चिंताजनक पाया गया। ज्यादा कैफीन लेने वाले बच्चे औसतन कम सोते थे, और छह महीने बाद उनमें मूड, ध्यान और व्यवहार की दिक्कतें भी ज्यादा देखी गईं। वैज्ञानिकों का मानना है कि नींद की कमी ही दिमाग पर पड़ रहे असर की मुख्य वजह हो सकती है। दरअसल, शोधकर्ताओं का कहना है कि वे यह साबित नहीं कर सके कि कैफीन ही इन बदलावों का सीधा कारण है।

रिसर्च की सबसे बड़ी सावधानी यह है कि यह अवलोकन आधारित अध्ययन है — कैफीन और दिमाग के बदलावों के बीच कारण-प्रभाव का रिश्ता पक्का नहीं किया गया। घर की आर्थिक स्थिति जैसे पहलुओं को ध्यान में रखने के बाद भी यह संबंध बना रहा, जो इसे गंभीर बनाता है। वहीं ब्रिटेन ने अगले साल अप्रैल से 16 साल से कम उम्र के बच्चों को कैफीन वाले एनर्जी ड्रिंक बेचने पर रोक लगाने का फैसला किया है।

भारत में भी टीनएजर्स के बीच एनर्जी ड्रिंक और मीठे सॉफ्ट ड्रिंक्स का चलन तेजी से बढ़ा है। माता-पिता को बच्चों के कैफीन सेवन पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि चाय और कॉफी में भी कैफीन होता है। इसके बाद बच्चों की नींद का नियमित समय तय करना और रात में स्क्रीन टाइम घटाना सबसे असरदार उपाय हो सकता है। पेट भरा होने के बावजूद बार-बार खाने की इच्छा भी बच्चों की सेहत से जुड़ी एक नई चिंता है — इस बारे में आप ‘फूड नॉयज’ पर हमारी यह रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं। पूरी रिसर्च की जानकारी के लिए मेडिकल एक्सप्रेस की यह रिपोर्ट देखी जा सकती है।

thefocusworld