भारत के महानगरों में नौकरी करने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। Loop Health की Workforce Health Index (WHI) 2026 रिपोर्ट बताती है कि शहरी कर्मचारियों की सेहत मधुमेह की उम्र से बहुत पहले ही बिगड़ने लगी है। ब्लड शुगर, नींद, तनाव, पोषण और लीवर — हर मोर्चे पर चेतावनी के संकेत मिले हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में जांच कराने वाले 31.3 प्रतिशत कर्मचारियों में ब्लड शुगर गड़बड़ी पाई गई। उम्र के साथ यह तेजी से बढ़ता है — 20 की उम्र में 16.7 प्रतिशत, 30 की उम्र में 33 प्रतिशत और 40 की उम्र में 52.9 प्रतिशत लोगों में यह समस्या मिली। हैरानी की बात यह है कि सिर्फ 5.8 प्रतिशत लोगों को ही डायबिटीज का पता चला था, यानी बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्या से बेखबर हैं।
हालांकि ब्लड शुगर के अलावा पोषण की कमी भी चिंताजनक है। 81.4 प्रतिशत विटामिन D रिपोर्टें पर्याप्त स्तर से नीचे मिलीं, जिनमें 60.1 प्रतिशत में गंभीर कमी दर्ज हुई। वहीं 73.9 प्रतिशत कर्मचारियों में विटामिन B12 की कमी और 14.5 प्रतिशत में एनीमिया पाया गया। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक शहरी भारतीयों के रोज के प्रोटीन सेवन में भी भारी कमी मिली है।
दरअसल जीवनशैली के आंकड़े भी राहत देने वाले नहीं हैं। 40.4 प्रतिशत कर्मचारियों ने उच्च तनाव की शिकायत की, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 33.9 प्रतिशत था। 30.7 प्रतिशत लोग रात में छह घंटे से कम सोते हैं, 47.3 प्रतिशत में ‘गुड कोलेस्ट्रॉल’ (HDL) कम मिला और 23.7 प्रतिशत में लीवर गड़बड़ी पाई गई।
शहरी कर्मचारियों की सेहत: महानगरों का हाल
इसके अलावा महानगरों में भी तस्वीर अलग-अलग है। मुंबई में ब्लड शुगर गड़बड़ी सबसे ज्यादा 46.8 प्रतिशत दर्ज हुई, जबकि बेंगलुरु में यह 30.7 प्रतिशत के साथ सबसे कम रही। दिल्ली-NCR में लीवर गड़बड़ी 34.4 प्रतिशत के साथ सबसे ऊपर रही, वहीं बेंगलुरु में विटामिन D की कमी 83.9 प्रतिशत के साथ सबसे ज्यादा मिली।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सेहत की जानकारी के लिए 54 प्रतिशत लोग अब भी डॉक्टरों या स्वास्थ्य पेशेवरों से सलाह लेते हैं। वहीं 19.8 प्रतिशत लोग ChatGPT जैसे AI टूल्स से और 19.7 प्रतिशत Google से जानकारी लेते हैं। यहां एक सावधानी भी जरूरी है — लैब डेटा, सर्वे और अस्पताल के दावे अलग-अलग लोगों के हो सकते हैं, क्योंकि तीनों डेटा सेट आपस में जुड़े नहीं हैं।
Loop Health के सह-संस्थापक और COO Ryan Singh का कहना है कि जोखिम के ये शुरुआती संकेत अक्सर बीमारी महसूस होने से पहले ही पकड़े जा सकते हैं। इसलिए समय पर जांच, डॉक्टर की सलाह और रोकथाम पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।






