44% लोगों की किडनी में खराबी, 98% को पता ही नहीं! केरल की इस स्टडी ने चौंका दिया

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44% लोगों की किडनी में खराबी, 98% को पता ही नहीं! केरल की इस स्टडी ने चौंका दिया
फोटो: स्वास्थ्य जांच शिविर (रामकृष्ण मिशन, काशी) | नेफ्रोलॉजिस्ट (एपेक्स हॉस्पिटल)

केरल के एत्तुमनूर में हुए एक बड़े अध्ययन ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। 30 साल से ऊपर के 1,031 लोगों की जांच में 44.4% तक में किडनी यानी गुर्दे की खराबी पाई गई, लेकिन इनमें से 98% से ज़्यादा को इसकी भनक तक नहीं थी। यही वजह है कि अब डॉक्टर किडनी खराबी के लक्षणों को लेकर जागरूकता पर ज़ोर दे रहे हैं, क्योंकि शुरुआती पहचान से बीमारी की रफ्तार को धीमा किया जा सकता है।

ये अध्ययन कोट्टायम के सरकारी मेडिकल कॉलेज ने मार्च 2024 से फरवरी 2025 के बीच किया, और नतीजे इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (IJMR) में 12 अक्टूबर को प्रकाशित हुए। आशा कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर 30 साल से ऊपर के वयस्कों की जांच की, जिसमें खून के क्रिएटिनिन और पेशाब के एल्ब्यूमिन की मात्रा नापी गई। किडनी की कार्यक्षमता आंकने के लिए तीन मान्य सूत्रों (MDRD, कॉकरॉफ्ट-गॉल्ट, CKD-EPI) का इस्तेमाल हुआ, और इसी वजह से खराबी का आंकड़ा 24.9% से 44.4% के बीच आया।

किडनी खराबी के लक्षण और अध्ययन के मुख्य नतीजे

MDRD सूत्र के हिसाब से 377 लोगों में किडनी की खराबी मिली, लेकिन इनमें से सिर्फ सात को पहले से पता था कि उन्हें गुर्दे की बीमारी है — बाकी 370 यानी 98.2% पूरी तरह बेखबर थे। 60 साल से ऊपर के लोगों में किडनी खराबी की संभावना 1.92 गुना ज़्यादा पाई गई। दरअसल किडनी की बीमारी चुपचाप बढ़ती है और शुरुआती दौर में कोई खास लक्षण नहीं दिखाती, इसलिए लोग देर से डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। इसीलिए शोधकर्ताओं ने कहा है कि किडनी की जांच को मौजूदा गैर-संचारी रोग कार्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए।

इसी जांच में ये भी सामने आया कि प्रतिभागियों में करीब 40% को डायबिटीज और करीब 59% को ब्लड प्रेशर की समस्या थी, जबकि ब्लड प्रेशर वालों में से 17% को अपनी बीमारी की जानकारी ही नहीं थी। दरअसल डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचाने के दो सबसे बड़े कारण माने जाते हैं — सफेद चावल और कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी हालिया चर्चा भी इसी दिशा की ओर इशारा करती है। हालांकि किडनी की बीमारी का कोई घरेलू इलाज नहीं है, वहीं खानपान और जीवनशैली में सुधार से इसके जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।

पैरों या चेहरे पर सूजन, लगातार थकान, पेशाब में झाग या गहरा रंग, रात में बार-बार पेशाब आना और भूख न लगना — इन संकेतों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। किडनी की जांच को नियमित स्वास्थ्य जांच का हिस्सा बनाएं, खासकर 40 की उम्र के बाद। पूरी स्टडी के नतीजे यहां पढ़ें — समय पर पहचान ही सबसे बड़ा इलाज है।

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