प्रोटीन-प्रोटीन बोलने वालों की थाली में निकली कमी! 70% शहरी भारतीय खाते हैं ज़रूरत से कम — स्टडी ने खोली पोल

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प्रोटीन-प्रोटीन बोलने वालों की थाली में निकली कमी! 70% शहरी भारतीय खाते हैं ज़रूरत से कम — स्टडी ने खोली पोल
प्रोटीन से भरपूर दाल मखनी और हेल्दी खाना खाती युवती। फोटो: potsandpans.in / Freepik (via Indian Express)

आज हर कोई प्रोटीन की बात करता है — जिम में, सोशल मीडिया पर और दोस्तों की महफिल में। लेकिन PepsiCo India और Euromonitor International की नई स्टडी ‘The State of Protein & Fibre in Urban India’ कहती है कि शहरी भारतीयों की थाली में प्रोटीन की कमी हकीकत में बनी हुई है। इस स्टडी में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और कोच्चि के 18 से 50 साल के 1,250 लोगों से बात की गई।

74 फीसदी लोगों का दावा था कि उन्हें अपनी रोज की प्रोटीन जरूरत का पता है, हालांकि सच ये है कि इनमें से 56 फीसदी लोग इस बारे में गलत जानकारी रखते थे। वहीं 70 फीसदी लोग रोज 41 ग्राम से भी कम प्रोटीन खाते हैं, जो सुझाई गई मात्रा से काफी नीचे है। फाइबर की स्थिति और भी खराब निकली — 59 फीसदी ने कहा कि उन्हें अपनी फाइबर जरूरत मालूम है, पर इनमें 89 फीसदी लोग गलतफहमी के शिकार थे।

प्रोटीन की कमी के पीछे दो बड़ी वजहें

स्टडी बताती है कि लागत सबसे बड़ी रुकावट है — 60 फीसदी लोगों ने कहा कि प्रोटीन वाला खाना महंगा पड़ता है। इसके बाद 57 फीसदी ने माना कि आसान और भरोसेमंद प्रोटीन विकल्प बाजार में मिलते ही नहीं। हर 10 में से 9 लोग चाहते हैं कि प्रोटीन को रोज के खाने में शामिल करना ज्यादा आसान और स्वाभाविक लगे।

फाइबर की बात करें तो यहां 61 फीसदी लोग रोज की सुझाई गई मात्रा से कम फाइबर खाते हैं। Gen X में यह कमी 65 फीसदी पर सबसे ज्यादा है, जबकि Gen Z और Millennials में 58 फीसदी लोग इससे जूझ रहे हैं। दरअसल, 89 फीसदी Gen Z चाहते हैं कि प्रोटीन जोड़ना आसान लगे और 90 फीसदी इसे रोजमर्रा के जाने-पहचाने रूपों में देखना चाहते हैं।

स्टडी को 6 अक्टूबर को CII के सहयोग से हुए एक कार्यक्रम में जारी किया गया, जहां पोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञ जुटे थे। PepsiCo India की डॉ. अंकिता मारवाह ने कहा कि जागरूकता अकेली काफी नहीं, असली काम तो सही जानकारी को रोज के चुनाव में बदलना है। स्वस्थ खाने से जुड़े लाभों पर हमारी पहले की रिपोर्ट भी पढ़ें: फ्री में मिला सेहतमंद खाना, 3 साल में घटा ब्लड प्रेशर। स्टडी के पूरे नतीजे The Tribune पर पढ़े जा सकते हैं।

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