ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के कमजोर होने की बीमारी को अब तक बुजुर्ग महिलाओं की समस्या माना जाता रहा है, लेकिन 2026 में आई एक नई रिसर्च ने पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (IJMR) में प्रकाशित सिस्टेमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस के मुताबिक, स्वस्थ दिखने वाले भारतीय पुरुषों में 14.6 प्रतिशत को ऑस्टियोपोरोसिस और 50.3 प्रतिशत को ऑस्टियोपेनिया पाया गया। सबसे डरावनी बात यह है कि यह बीमारी अक्सर बिना किसी लक्षण के चुपचाप पनपती रहती है।
पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस पर क्या कहती है 2026 की रिसर्च
यह रिसर्च कोई छोटा सर्वे नहीं, बल्कि 21 अलग-अलग अध्ययनों का विश्लेषण है, जिसमें DXA स्कैन से हड्डियों के घनत्व को मापा गया। कुल 1569 पुरुषों के डेटा से ऑस्टियोपोरोसिस की दर 14.6 प्रतिशत निकली, जबकि 1585 पुरुषों के आंकड़ों से ऑस्टियोपेनिया की दर 50.3 प्रतिशत दर्ज की गई। कैलाश अस्पताल, नोएडा के सीनियर कंसल्टेंट (जॉइंट एवं नी रिप्लेसमेंट सर्जन) डॉ. सुशील शर्मा कहते हैं, “ऑस्टियोपोरोसिस पर अक्सर तब तक ध्यान नहीं जाता, जब तक कोई फ्रैक्चर न हो जाए।” हालांकि अध्ययन के डेटा में काफी विविधता भी दर्ज की गई, इसलिए रिसर्चर इन आंकड़ों को सावधानी से देखने की सलाह देते हैं।
हड्डियां जीवित ऊतक होती हैं, जो लगातार टूटती और बनती रहती हैं। युवावस्था में शरीर हड्डी का द्रव्यमान बढ़ाता है, जो 20 के दशक के अंत तक चरम पर पहुंच जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे क्षरण शुरू होता है, और गलत खानपान, शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान व शराब इस प्रक्रिया को तेज कर देते हैं। दरअसल, युवावस्था में बनाई गई मजबूत हड्डियां ही बुढ़ापे की कमजोरी के खिलाफ सबसे बड़ा बचाव होती हैं।
कमजोर हड्डियों के लक्षण और बचाव के 5 तरीके
ऑस्टियोपोरोसिस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते; कई लोगों को इसका पता तब चलता है जब मामूली गिरावट में ही हड्डी टूट जाती है। लगातार पीठ दर्द, समय के साथ लंबाई का घटना और झुकी हुई मुद्रा ऐसे संकेत हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उम्र और जोखिम कारकों के आधार पर डॉक्टर बोन डेंसिटी टेस्ट की सलाह दे सकते हैं, जिसमें DXA स्कैन सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है।
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए रोजाना वजन वाली एक्सरसाइज करें — पैदल चलना, दौड़ना या सीढ़ियां चढ़ना जैसे व्यायाम हड्डियों को मजबूती देते हैं। (जानिए रोज कितने कदम चलना है जरूरी) इसके बाद कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर आहार लें, धूप में कुछ मिनट बिताएं और धूम्रपान-शराब से दूरी बनाएं। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के डॉक्टर भी जल्दी स्क्रीनिंग की अपील कर रहे हैं, क्योंकि सही समय पर उठाए गए ये कदम फ्रैक्चर का खतरा काफी कम कर सकते हैं।






