डाइट तो हर कोई कर रहा है, पर सेहत फिर भी क्यों गिर रही? सर्वे में चौंकाने वाला सच

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डाइट तो हर कोई कर रहा है, पर सेहत फिर भी क्यों गिर रही? सर्वे में चौंकाने वाला सच
फोटो क्रेडिट: वनेसा लोरिंग (Pexels) और Oryx In-flight Magazine।

अजीब लग सकता है, पर एक सर्वे ने कुछ ऐसा ही दिखाया है कि लोग खाने-पीने पर पहले से कहीं ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, फिर भी उनकी अपनी सेहत की राय लगातार बिगड़ती जा रही है। 2026 IFIC Food & Health Survey के मुताबिक लगभग दो-तिहाई (64%) लोगों ने पिछले साल किसी न किसी डाइटिंग पैटर्न को अपनाया, जो 2018 से अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। डाइटिंग और सेहत के बीच का ये उल्टा रिश्ता इसलिए भी हैरान करता है, क्योंकि लोग खुद को पहले से ज्यादा जानकार और सतर्क मानते हैं। वहीं सर्वे ने ये भी साफ किया कि अपनी सेहत को ‘बहुत अच्छी’ बताने वालों की हिस्सेदारी अब तक के सबसे निचले स्तर पर है।

डाइटिंग और सेहत का अजीब रिश्ता: 64% डाइट पर, सिर्फ 40% संतुष्ट

सर्वे बताता है कि हाई प्रोटीन डाइट लगातार चौथे साल सबसे लोकप्रिय बनी हुई है, जिसे 27% लोगों ने अपनाया, जबकि 2018 में ये आंकड़ा सिर्फ 4% था। इसके बाद लो-शुगर (22%), माइंडफुल ईटिंग (21%) और क्लीन ईटिंग (17%) जैसे पैटर्न आगे हैं, और 70% लोग रोजमर्रा में प्रोटीन बढ़ाने की कोशिश करते हैं, हालांकि प्रोटीन को लेकर आम लोगों में भ्रम भी कम नहीं है। हालांकि इतनी कोशिशों के बावजूद सिर्फ 40% लोग ही अपनी सेहत को ‘एक्सीलेंट’ या ‘वेरी गुड’ मानते हैं। दरअसल पिछले एक साल में ही इस आंकड़े में आठ प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।

हेल्दी एजिंग बनी सबसे बड़ी चाहत

ये भी दिलचस्प है कि इस बार लोगों ने खाने से जिस सबसे बड़े फायदे की उम्मीद जताई है, वो है हेल्दी एजिंग, जिसने चार साल से टॉप पर चल रही ‘एनर्जी’ को पीछे छोड़ दिया है। IFIC की CEO वेंडी राइनहार्ट कैपसाक का कहना है कि लोग विशेषज्ञों की सलाह मान रहे हैं — प्रोटीन पर ध्यान दे रहे हैं, डाइट पैटर्न अपना रहे हैं — इसके बाद भी उन्हें वो सुधार महसूस नहीं हो रहा, जिसकी वो उम्मीद करते हैं। दरअसल विशेषज्ञ मानते हैं कि डाइट सेहत का एक टुकड़ा भर है, और नींद, तनाव व रोज की आदतें भी उतनी ही मायने रखती हैं। हालांकि ये सर्वे अमेरिका में किया गया है और इसमें लोगों की खुद बताई हुई राय शामिल है, पर इसका सबक भारतीय पाठकों के लिए भी काम का है।

निष्कर्ष: डाइट से ज्यादा जरूरी है संतुलन

कुल मिलाकर ये सर्वे एक सीधी बात कहता है कि डाइटिंग को हथियार बनाने से पहले अपने शरीर की बात समझना ज्यादा जरूरी है। इसके बाद खाने में संतुलन रखना, नींद पूरी लेना और तनाव संभालना भी उतना ही जरूरी है। वहीं त्योहारों के मौसम में, जब थाली से लेकर मिठाई तक हर तरफ प्रलोभन हो, तो ‘सब कुछ या कुछ नहीं’ वाली सोच से बचना ही समझदारी है।

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