बच्चों के पेट में चुपचाप फैल रही ये खतरनाक समस्या, मां-बाप को पता भी नहीं चलता — जानें चेतावनी के संकेत

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बच्चों के पेट में चुपचाप फैल रही ये खतरनाक समस्या, मां-बाप को पता भी नहीं चलता — जानें चेतावनी के संकेत
पेट दर्द से परेशान बच्चा (बाएं: Shutterstock) और चिप्स खाते बच्चे (दाएं: kazpravda.kz) — TheFocusWorld कोलाज

आपका बच्चा बार-बार पेट दर्द की शिकायत करता है, खाना ठीक से नहीं खाता या जल्दी थक जाता है? इसे मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। जाने-माने पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. एकांश अग्रवाल (गिरिश नर्सिंग होम एंड एंडोस्कोपी सेंटर, बरेली, उत्तर प्रदेश) ने चेतावनी दी है कि भारत के बच्चों में बच्चों की गट हेल्थ से जुड़ी एक खामोश समस्या तेजी से फैल रही है, जिसे मां-बाप अक्सर पकड़ ही नहीं पाते। आंतों के सूक्ष्म जीव (गट माइक्रोब्स) खाना पचाने के साथ-साथ पोषक तत्वों को सोखने और शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, बच्चों की बदलती दिनचर्या गट हेल्थ पर सबसे ज्यादा दबाव डाल रही है। पैकेज्ड फूड और मीठे स्नैक्स का रोजाना सेवन, जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम, कम शारीरिक गतिविधि और बाहर खेलने के कम मौके — ये सभी आंतों के माइक्रोब्स का संतुलन बिगाड़ सकते हैं। वहीं, बार-बार या बिना जरूरत एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल भी इस संतुलन को खराब करता है। गट माइक्रोबायोम में असंतुलन सूजन, एलर्जी और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याओं से भी जुड़ा पाया गया है। हाल ही में आई एक बच्चों की सेहत पर रिसर्च ने भी गलत खान-पान की आदतों को लेकर चेतावनी दी थी।

बच्चों की गट हेल्थ: इन चेतावनी संकेतों को न करें नजरअंदाज

गट से जुड़ी परेशानी हमेशा तेज पेट दर्द के रूप में सामने नहीं आती, इसलिए इन संकेतों को पहचानना जरूरी है। डॉक्टर के अनुसार, बार-बार पेट में हल्का दर्द, जल्दी पेट भर जाना, बाउल हैबिट्स (शौच की आदतों) में बदलाव और भूख का कम लगना — ये सभी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। इसके बाद कुछ और लक्षणों पर भी ध्यान देना चाहिए, जैसे लगातार थकान, बार-बार बीमार पड़ना, ध्यान लगाने में दिक्कत या अचानक मूड में बदलाव। हालांकि, ये लक्षण कई कारणों से हो सकते हैं, इसलिए इन्हें तुरंत गट हेल्थ से जोड़ लेना गलत होगा। लेकिन अगर ये लक्षण बार-बार या लंबे समय तक बने रहें, तो इन्हें नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

बचाव का पहला कदम है बच्चों की थाली सुधारना। डॉ. अग्रवाल सलाह देते हैं कि ओट्स, सेब और ब्रोकली जैसे फाइबर से भरपूर फूड्स गट के फायदेमंद बैक्टीरिया को पोषण देते हैं। इसके अलावा दही और फर्मेंटेड फूड्स भी फायदेमंद माइक्रोब्स दे सकते हैं। पैकेज्ड स्नैक्स कम करें और एंटीबायोटिक सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर दें। हालांकि, सिर्फ खाना काफी नहीं है — नियमित खेल, बाहर की गतिविधि और पर्याप्त नींद भी उतनी ही जरूरी है।

डॉ. अग्रवाल का मुख्य संदेश साफ है — गट हेल्थ को बच्चों की रोजमर्रा की देखभाल का हिस्सा बनाएं। बार-बार दिखने वाले लक्षणों पर ध्यान दें, संतुलित आहार दें और बच्चों को सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित करें। इस विषय पर विस्तृत जानकारी के लिए India TV की रिपोर्ट पढ़ें। नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; बच्चे की सेहत से जुड़ा फैसला लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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