आज रविवार 8 नवंबर को देशभर में दिवाली है, लेकिन जश्न की रात हवा में खतरनाक ज़हर भी घुलेगा। अध्ययनों के मुताबिक पटाखों से रात में PM2.5 का स्तर कुछ ही घंटों में 300 से 800 फीसदी तक बढ़ जाता है। दरअसल रात 10 बजे से 1 बजे के बीच कई इलाकों में PM2.5 का स्तर 800 से 1,000 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच जाता है, जो सुरक्षित सीमा से 15 गुना ज़्यादा है। वहीं सर्दियों की ठंडी हवा इस ज़हरीली धुंध को देर तक रोके रखती है।
दिवाली प्रदूषण: पटाखों से हवा में कौन सी ज़हरीली धातुएं
पटाखों के रंगों की चमक के पीछे भारी धातुओं का ज़हर छिपा होता है। दिवाली की रात बेरियम का स्तर सामान्य दिनों के मुकाबले 140 गुना और स्ट्रॉन्शियम का स्तर 450 गुना तक बढ़ जाता है। दरअसल एल्युमीनियम, पोटैशियम और तांबा जैसी धातुएं भी फेफड़ों और खून में पहुंचती हैं, जिससे शरीर में सूजन बढ़ती है। वहीं इन महीन कणों का असर सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह दिल की सेहत पर भी पड़ता है।
इस ज़हरीली हवा का सबसे ज़्यादा खतरा बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्थमा, दिल की बीमारी या डायबिटीज़ के मरीज़ों को होता है। हर साल दिवाली के बाद अस्पतालों में सांस लेने में तकलीफ, अस्थमा के दौरे, आंखों में जलन और त्वचा की एलर्जी के मामले बढ़ जाते हैं। दरअसल पटाखों के धुएं की परेशानी रात भर में खत्म नहीं होती, बल्कि अगले कुछ दिनों तक यह ज़हर सेहत को नुकसान पहुंचाता रहता है। वहीं दिल्ली में दिवाली से पहले ही AQI 369 तक पहुंच गया था, जिससे GRAP-3 के प्रतिबंध भी लागू करने पड़े थे।
हालांकि कुछ आसान उपायों से सेहत को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है। रात 10 बजे से 1 बजे के बीच जब प्रदूषण सबसे ज़्यादा होता है, तब घर के अंदर रहें और खिड़कियां बंद रखें। दरअसल बाहर निकलना ज़रूरी हो तो N95 मास्क पहनें, और घर में एयर प्यूरीफायर या अच्छे वेंटिलेशन का इस्तेमाल करें। वहीं पटाखों की जगह दीये जलाना न सिर्फ परंपरा को बचाता है, बल्कि हवा को भी साफ रखता है और कुम्हारों की रोज़ी-रोटी में भी मदद करता है।
दिवाली के अगले दिन सुबह की सैर से बचें, क्योंकि सुबह की ठंडी हवा में प्रदूषण सबसे ज़्यादा जमा रहता है और AQI देखकर ही बाहर निकलें। गौरतलब है कि दिवाली की रात हवा में PM2.5 और भारी धातुओं का स्तर कई गुना बढ़ जाता है। कुल मिलाकर, दिवाली का जश्न ज़रूर मनाएं, लेकिन सेहत की कीमत पर नहीं — थोड़ी सी सावधानी से यह त्योहार रोशनी के साथ-साथ सेहत के लिए भी अच्छा बन सकता है।






