रोज़ पैदल चलना सेहत के लिए फायदेमंद है, ये बात तो हम सब जानते हैं, लेकिन अब हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक बड़ी स्टडी ने इस पर नई रोशनी डाली है। दरअसल, शोधकर्ताओं ने पाया कि कितने कदम चले, इससे ज़्यादा मायने रखता है कि कितनी रफ़्तार से चले। वहीं, अच्छी खबर ये है कि 10,000 कदम का पुराना लक्ष्य पूरा न कर पाने वालों को भी घबराने की ज़रूरत नहीं।
यह स्टडी सितंबर 2026 में प्रतिष्ठित ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित हुई है। इसमें ब्रिटेन के 64,743 वयस्कों को शामिल किया गया, जिनकी औसत उम्र 62 साल थी। इसके बाद सभी प्रतिभागियों ने एक हफ़्ते तक कलाई पर एक्टिविटी ट्रैकर पहना, जिससे उनके रोज़ के कदमों की संख्या और चलने की रफ़्तार मापी गई। करीब आठ साल के फॉलो-अप में अध्ययन समूह में 1,697 मौतें हुईं, जिनमें 502 मौतें हृदय रोग से थीं।
शोध में पाया गया कि रोज़ाना 7,500 से 10,000 कदम चलने वालों में मृत्यु दर सबसे कम थी। हालांकि, रफ़्तार भी उतनी ही अहम निकली — जो लोग 5,000 से कम कदम चलते थे लेकिन तेज़ रफ़्तार से चलते थे, उनका जोखिम उतना ही कम था जितना 5,000 से 7,500 कदम धीरे चलने वालों का। दरअसल, शोधकर्ताओं के मुताबिक रोज़ाना 30 मिनट तक 90 से 100 कदम प्रति मिनट की रफ़्तार से चलना लंबी उम्र का एक अच्छा लक्ष्य हो सकता है।
रोज़ पैदल चलना: रफ़्तार बढ़ाने के आसान तरीके
विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्टडी का सबसे बड़ा संदेश है — लचीलापन। अगर समय की कमी से लंबे समय तक चलना मुमकिन न हो, तो चलने की रफ़्तार बढ़ा दीजिए। वहीं, अगर तेज़ चलना मुश्किल है, तो आराम से लेकिन ज़्यादा कदम चलना भी फ़ायदा देता है। हालांकि, छोटी-छोटी बिखरी वॉक की जगह लगातार 15 से 30 मिनट की एक ब्रिस्क वॉक बेहतर मानी गई है।
यहां एक अहम सावधानी भी ज़रूरी है — यह एक ऑब्ज़र्वेशनल स्टडी है, यानी इसमें संबंध पाए गए हैं, न कि सीधे कारण और असर का सबूत। शोधकर्ताओं ने खुद कहा है कि 90 या 100 कदम प्रति मिनट कोई जादुई संख्या नहीं है। इसके बाद भी, यह निष्कर्ष लाखों लोगों के वर्षों के डेटा पर आधारित है, इसलिए इसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता।
भारत में जहां कई लोग समय की कमी का हवाला देकर वॉक छोड़ देते हैं, उनके लिए यह स्टडी राहत भरी है। दरअसल, आधे घंटे की तेज़ वॉक अब एक वैज्ञानिक लक्ष्य बन गया है। हालांकि, हृदय रोगियों और बुज़ुर्गों को तेज़ वॉक शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लेनी चाहिए — और इस विषय पर हमने पहले भी लिखा था कि प्रदूषण में भी वॉक करना फायदेमंद क्यों माना जाता है। (स्रोत: Harvard Health Publishing)






