ऑस्ट्रेलिया के विकेटकीपर-बल्लेबाज़ जोश इंग्लिस ने गुरुवार 29 अक्टूबर को न्यूलैंड्स में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे टेस्ट में 102 रन की पारी खेलकर जोश इंग्लिस शतक का एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया, जो इससे पहले किसी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ के नाम नहीं था। उनकी इस पारी ने ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी में 100 रन की अहम बढ़त दिलाई और सीरीज़ के निर्णायक मुकाबले में टीम को मज़बूत स्थिति में पहुंचा दिया। हालांकि यह शतक सिर्फ एक पारी का आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह इंग्लिस की तीनों फॉर्मेट में लगातार बढ़ती अहमियत की कहानी भी कहता है।
दरअसल, इंग्लिस की टेस्ट टीम में वापसी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी, क्योंकि वह करीब एक साल बाद टेस्ट प्लेइंग इलेवन में लौटे थे और उन्हें आखिरी समय में टीम में जगह मिली थी। इसके बाद उन्होंने 132 गेंदों पर शतक पूरा किया, जिसमें संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखा। वहीं, दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी में 329 रन बनाए थे, लेकिन इंग्लिस की पारी के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने बढ़त हासिल की और मुकाबले का रुख अपनी ओर मोड़ लिया।
जोश इंग्लिस शतक: तीनों फॉर्मेट में 2-2 शतक का मतलब
इस शतक के साथ इंग्लिस के नाम टेस्ट में दो, वनडे में दो और टी20 अंतरराष्ट्रीय में दो शतक हो गए हैं, और वह तीनों फॉर्मेट में कम से कम दो-दो शतक लगाने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ बन गए हैं। आंकड़ों पर नज़र डालें तो उन्होंने अब तक छह टेस्ट में 286 रन, 43 वनडे में 1100 रन और 49 टी20 अंतरराष्ट्रीय में 1033 रन बनाए हैं।
इस रिकॉर्ड की असली अहमियत तब समझ आती है, जब इसकी तुलना ऑस्ट्रेलिया के दो बड़े व्हाइट-बॉल सितारों से की जाती है, क्योंकि ग्लेन मैक्सवेल और एरॉन फिंच भी इस मुकाम तक नहीं पहुंच सके थे। मैक्सवेल के नाम पांच टी20 और चार वनडे शतक हैं, लेकिन टेस्ट में उनके नाम सिर्फ एक शतक है, जो उन्होंने 2017 में भारत के खिलाफ लगाया था। वहीं, फिंच ने वनडे में 17 और टी20 में दो शतक लगाए, लेकिन वह टेस्ट क्रिकेट में कभी शतक नहीं लगा सके, इसलिए इंग्लिस की यह उपलब्धि और भी खास हो जाती है।
क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह कहानी इसलिए भी प्रेरणादायक है, क्योंकि इंग्लिस ने लंबे समय तक सीमित मौके मिलने के बावजूद अपनी तैयारी और आत्मविश्वास को कम नहीं होने दिया। टीम इंडिया की तरह ही ऑस्ट्रेलिया भी अपने युवा और बहुमुखी खिलाड़ियों पर भरोसा दिखा रहा है, और इंग्लिस इसका सबसे ताज़ा उदाहरण बन गए हैं। इस रिकॉर्ड की पुष्टि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और अन्य प्रमुख खेल माध्यमों ने भी की है, जिससे यह उपलब्धि आधिकारिक तौर पर इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है।






