भारत में iPhone 17 कीमत को लेकर Apple का फैसला अब कंपनी के लिए ही भारी पड़ता दिख रहा है, क्योंकि कीमत बढ़ने के बाद बेस मॉडल की मांग कमजोर पड़ गई है। यह फोन भारत में 256GB वेरिएंट के लिए 82,900 रुपये में लॉन्च हुआ था, लेकिन बाद में इसकी कीमत बढ़ाकर 99,900 रुपये कर दी गई, यानी करीब 17,000 रुपये या 20.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं मौजूदा iPhone मॉडलों की कीमतों में कुल मिलाकर 20 से 29 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है, जिसके पीछे मेमोरी और कंपोनेंट की बढ़ती लागत के साथ रुपये की कमजोरी को वजह बताया जा रहा है।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मांग कमजोर पड़ने के बाद Apple ने भारत के लिए तय स्टैंडर्ड iPhone 17 का प्रोडक्शन घटा दिया है, हालांकि विदेशों में इस मॉडल की मांग मजबूत बनी हुई है। दरअसल, भारत के लिए खाली हुई प्रोडक्शन क्षमता को एक्सपोर्ट ऑर्डरों की तरफ मोड़ दिया जा रहा है, जिससे कुल उत्पादन पर असर मामूली रहने का अनुमान है। इसके बाद कंपनी के इस कदम को एक अस्थायी समायोजन के तौर पर भी देखा जा रहा है, क्योंकि अगर आने वाले महीनों में मांग सुधरती है तो प्रोडक्शन फिर बढ़ाया जा सकता है।
iPhone 17 कीमत बढ़ने से खरीदारों ने क्या रास्ता चुना
कीमत बढ़ने का सबसे बड़ा असर खरीदारों के फैसले पर पड़ा है, क्योंकि कई लोग खरीदारी टाल रहे हैं या फिर पुराने व रिफर्बिश्ड मॉडलों की तरफ देख रहे हैं। वहीं एक बड़ा वर्ग फेस्टिव सीजन में बेस मॉडल की तुलना में 15,000 से 25,000 रुपये ज्यादा खर्च करके Pro मॉडल की तरफ बढ़ गया है, जिससे iPhone 17 Pro और iPhone 18 Pro की मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि स्टैंडर्ड मॉडल भारत में iPhone की कुल बिक्री का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, लेकिन विश्लेषकों का अनुमान है कि Pro मॉडलों की हिस्सेदारी मौजूदा 15 प्रतिशत से बढ़कर आने वाले महीनों में 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
इस पूरी कहानी में Apple का बदला हुआ लॉन्च कैलेंडर भी अहम भूमिका निभा रहा है, क्योंकि सितंबर में सिर्फ iPhone 18 Pro रेंज और फोल्डेबल iPhone Duo आए थे और कोई स्टैंडर्ड iPhone 18 नहीं आया। वहीं कई खरीदार इस उम्मीद में भी खरीदारी टाल रहे हैं कि स्टैंडर्ड iPhone 18 फरवरी में करीब-करीब मौजूदा iPhone 17 जैसी कीमत पर आ सकता है, हालांकि Apple ने इस समय-सीमा या कीमत की पुष्टि नहीं की है। iPhone 17 पर पहले मिले फेस्टिव ऑफर के बारे में यहां पढ़ें। इस खबर के मुख्य तथ्य इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट पर आधारित हैं।






