कजाकिस्तान के अस्ताना में चल रही सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत की 20 साल की पहलवान तनु शर्मा ने तनु शर्मा कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। गुरुवार 29 अक्टूबर को खेले गए 72 किलोग्राम वर्ग के कांस्य पदक मुकाबले में तनु ने अमेरिका की प्रेशियस रोसाना बेल को 9-5 से हराया और अपने पहले ही सीनियर विश्व चैंपियनशिप में पोडियम पर जगह बना ली। हालांकि यह सफर आसान नहीं था, क्योंकि शुरुआती मुकाबले में हार के बाद उन्हें रेपचेज के रास्ते से वापसी करनी पड़ी थी। इसके बाद भी उन्होंने दो लगातार मुकाबले जीतकर यह साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और बड़े मंच पर दबाव में भी दमदार प्रदर्शन किया जा सकता है।
तनु शर्मा कांस्य पदक की पूरी कहानी
तनु का अभियान पहले ही मुकाबले में झटके के साथ शुरू हुआ था, जब पोलैंड की विक्टोरिया चोलुज ने उन्हें हराकर आगे का रास्ता मुश्किल कर दिया था। दरअसल, चोलुज के फाइनल में पहुंचने के बाद तनु को रेपचेज में दूसरा मौका मिला और उन्होंने ट्यूनीशिया की अफ्रीकी चैंपियन ज़ैनब सगायर को 5-4 से हराकर कांस्य पदक मुकाबले में जगह बनाई। इसके बाद अमेरिकी पहलवान के खिलाफ उन्होंने शुरुआत से ही बढ़त बनाई और 9-5 की जीत के साथ कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। वहीं इस साल की शुरुआत में तनु ने अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक भी जीता था, जिससे उनका सीनियर स्तर पर यह डेब्यू साल और भी खास बन गया है।
हरियाणा के हांसी के भाकलाना गांव की रहने वाली तनु के पिता वीरेंद्र शर्मा सरकारी स्कूल में संस्कृत के शिक्षक हैं और वह घबराहट के कारण बेटी के मुकाबले कभी नहीं देखते हैं। हालांकि जब परिवार ने कांस्य पदक की जीत पर खुशी मनाई तब जाकर उन्हें राहत मिली, क्योंकि बेटी की मेहनत को दुनिया के सबसे बड़े मंच पर पहचान मिल गई थी। वहीं भारतीय महिला पहलवानों की इस पीढ़ी के लिए यह पदक एक नई प्रेरणा बन गया है, क्योंकि युवा खिलाड़ी अब पहले ही प्रयास में विश्व पदक का सपना देखने लगे हैं।
उसी दिन भारत के लिए एक और अच्छी खबर मनीषा भानवाला के रूप में आई, जिन्होंने 59 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में मंगोलिया की बोलोरतुया खुरेलखू को हराकर फाइनल में जगह बना ली और कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया। अब मनीषा का स्वर्ण पदक मुकाबला अमेरिका की एबिगेल एलिजाबेथ नेट से होगा, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी। दरअसल, एक ही चैंपियनशिप में दो भारतीय महिला पहलवानों का पोडियम तक पहुंचना भारतीय कुश्ती की बढ़ती गहराई को दिखाता है। इसके बाद तनु की नजर अब अगले बड़े टूर्नामेंटों पर होगी, जहां वह इस कांस्य पदक को स्वर्ण में बदलने की कोशिश करेंगी।






