रात में रोशनी में सोने की आदत आपके दिल के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। हाल में सामने आई एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्टडी ने खुलासा किया है। यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित इस शोध में वैज्ञानिकों ने रात के उजाले और दिल की बीमारियों के बीच गहरा संबंध पाया है। हालांकि यह एक अवलोकन आधारित अध्ययन है, इसलिए कारण और परिणाम का दावा पूरी तरह नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके आंकड़े निश्चित रूप से चिंताजनक हैं।
रात में रोशनी में सोना: स्कैन में क्या मिला
यह शोध अमेरिका की ट्यूलेन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लू ची के नेतृत्व में किया गया। इसमें ब्रिटेन के 11,071 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया। सभी प्रतिभागियों ने सात दिनों तक कलाई पर एक लाइट सेंसर पहना, जिससे रात के समय उन तक पहुंचने वाली रोशनी का सटीक माप मिल सका। करीब तीन साल बाद सभी का कार्डिएक MRI स्कैन किया गया, ताकि दिल के आकार और उसकी धड़कने की क्षमता में हुए बदलावों को सीधे देखा जा सके।
जिन लोगों को रात में 3 लक्स से ज्यादा रोशनी मिली, उनके दिल की मुख्य दीवार मोटी पाई गई और दिल का सिकुड़ना-फैलना कमजोर हुआ। इसके बाद 73 हजार लोगों को आठ से दस साल तक फॉलो किया गया। इस लंबे निगरानी चरण में ज्यादा रोशनी वाले समूह में हार्ट फेलियर का खतरा 29 प्रतिशत, दिल की धड़कन की गड़बड़ी का 15 प्रतिशत, हार्ट अटैक का 24 प्रतिशत और स्ट्रोक का 33 प्रतिशत अधिक दर्ज हुआ। वहीं दिल की बीमारी से मौत का खतरा भी 26 प्रतिशत तक ज्यादा पाया गया।
वैज्ञानिकों का मानना है कि रात की रोशनी शरीर की अंदरूनी घड़ी यानी सर्केडियन रिदम को बिगाड़ देती है, जिससे नींद छोटी और टूटी-फूटी होती है। दरअसल, शोध में पाया गया कि दिल पर पड़ने वाले असर का 24 से 49 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ नींद की कमी से समझाया जा सकता है। इसके बाद भी यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह अध्ययन अवलोकन आधारित है और रोशनी सिर्फ सात दिनों तक मापी गई थी। हालांकि शोधकर्ताओं ने काम के घंटे, शहरी जीवन और अन्य कारकों के लिए समायोजन किया, फिर भी पूरी तरह कारण सिद्ध नहीं होता।
अच्छी खबर यह है कि बचाव बेहद आसान है — कमरे को पूरी तरह अंधेरा रखना ही सबसे कारगर उपाय है। खिड़कियों पर ब्लैकआउट पर्दे लगाएं, मोबाइल और डिवाइस की छोटी-बड़ी डिस्प्ले लाइटें बंद करें, और जरूरत पड़े तो स्लीप मास्क का इस्तेमाल करें। रात में बाथरूम जाने के लिए तेज लाइट की जगह मोशन-सेंसर नाइट लाइट लगाना भी अच्छा विकल्प है। दिल की सेहत पर पहले भी 65,364 भारतीयों की एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ था; वहीं हार्वर्ड हेल्थ ने भी इस शोध के नतीजों को विस्तार से समझाया है।






