क्या रोज़ाना 8000 कदम चलने से दिमाग की सेहत सुधर सकती है? अमेरिकी न्यूरोलॉजिस्टों के एक बड़े अध्ययन ने इस सवाल का जवाब देने की कोशिश की है। 19 अक्टूबर 2026 को सैन डिएगो में अमेरिकन न्यूरोलॉजिकल एसोसिएशन की बैठक में पेश इस स्टडी में फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 22,517 वयस्कों के एक पूरे साल के फिटबिट डेटा का विश्लेषण किया। इसके बाद करीब पांच साल तक उनके मेडिकल रिकॉर्ड खंगाले गए, ताकि चलने और दिमागी बीमारियों के रिश्ते को समझा जा सके।
नतीजे काफी चौंकाने वाले रहे। रोज़ाना 4,800 से कम कदम चलने वालों में डिमेंशिया, पार्किंसन और स्ट्रोक की दर 12,600 से ज्यादा कदम चलने वालों से करीब 80% ज्यादा मिली। करीब 8,300 कदम चलने वाले मध्यम समूह की स्थिति इन दोनों के बीच रही — यानी ज्यादा चलना, कम खतरे से सीधे जुड़ा दिखा। कुल 343 लोगों में नई दिमागी बीमारी की पहचान हुई; कम चलने वालों में प्रति 1,000 लोगों पर 3.8 केस मिले, जबकि ज्यादा चलने वालों में सिर्फ 2.1।
रोज़ाना 8000 कदम वालों के लिए अच्छी खबर
सबसे राहत भरी बात यह है कि 12,000 कदम का लक्ष्य किसी के लिए जरूरी नहीं निकला। शोधकर्ताओं के मुताबिक रोज़ाना औसतन 8,000 कदम चलने वालों में भी दिमागी बीमारियों की दर सबसे कम चलने वालों से साफ तौर पर कम रही। सह-शोधकर्ता डॉ. मार्क स्वर्लॉफ के मुताबिक यह लक्ष्य हफ्ते में 150 मिनट मध्यम गतिविधि वाले अमेरिकी दिशा-निर्देशों से भी मेल खाता है। दरअसल यह एक ऐसा यथार्थवादी लक्ष्य है, जिसे रोज़मर्रा की जिंदगी में अपनाना मुश्किल नहीं।
हालांकि यह शोध अभी एक वैज्ञानिक बैठक में पेश हुआ है और समकक्ष समीक्षा के बाद जर्नल में प्रकाशित होना बाकी है, इसलिए नतीजे प्रारंभिक माने जाएंगे। यह एक अवलोकनात्मक अध्ययन है — यानी यह कदमों और दिमागी सेहत के बीच जुड़ाव दिखाता है, कारण-परिणाम का दावा नहीं करता। यह भी संभव है कि शुरुआती दिमागी दिक्कतों वाले लोग पहले से कम चलने लगे हों, इसलिए कम कदमों को डर की वजह न बनाएं बल्कि एक हेल्थ चेकअप का इशारा मानें। स्टडी में NIH के All of Us प्रोग्राम का डेटा इस्तेमाल हुआ था; विस्तृत रिपोर्ट यहां पढ़ें।
भारत के संदर्भ में यह संदेश खास अहमियत रखता है, क्योंकि शहरों में ज्यादातर लोग दिनभर बैठकर काम करते हैं। शुरुआत में छोटे लक्ष्य रखें — जैसे लंच के बाद 15 मिनट की सैर — और धीरे-धीरे बढ़ाएं; नई एक्सरसाइज रूटीन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 10,000 कदम के मशहूर नियम की सच्चाई जानने के लिए हमारी यह रिपोर्ट भी पढ़ें, जिसमें दिल के डॉक्टरों ने असली सलाह दी है। दरअसल दिमागी सेहत का फॉर्मूला महंगी जिम फीस में नहीं, बल्कि रोज़ की थोड़ी सी नियमित सैर में छिपा हो सकता है।






