45 साल से पहले होने वाली टाइप 2 डायबिटीज को लेकर अब तक यही माना जाता रहा है कि एक बार हो गई तो यह जिंदगी भर साथ रहेगी। हालांकि कनाडा और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों के एक नए ट्रायल ने इस धारणा को चुनौती दी है। शोधकर्ताओं ने पाया कि कम कैलोरी वाली डाइट और स्ट्रक्चर्ड एक्सरसाइज के कॉम्बो से आधे से ज्यादा मरीज़ों की डायबिटीज रेमिशन में चली गई। यानी दवा के बिना भी बीमारी को पलटना संभव हो सकता है।
इस ट्रायल का नाम RESET for Remission है, जिसे मॉन्ट्रियल की McGill University की प्रोफेसर काबेरी दासगुप्ता और ब्रिटेन की University of Leicester के प्रोफेसर थॉमस येट्स ने लीड किया। नतीजे मिलान में हुई European Association for the Study of Diabetes की सालाना मीटिंग में पेश किए गए। साथ ही यह स्टडी 1 अक्टूबर को प्रतिष्ठित जर्नल The Lancet Regional Health: Americas में प्रकाशित हुई। ट्रायल में 18 से 45 साल के 96 ऐसे वयस्क शामिल किए गए, जिन्हें शुरुआती टाइप 2 डायबिटीज और मोटापा था और जो इंसुलिन नहीं ले रहे थे।
टाइप 2 डायबिटीज के ट्रायल में मरीज़ों से क्या-क्या कराया गया
मरीज़ों को दो ग्रुप में बांटा गया — एक को सामान्य इलाज मिला और दूसरे को खास इंटरवेंशन दिया गया। इंटरवेंशन ग्रुप को रोज सिर्फ 800 से 900 कैलोरी वाली लो-एनर्जी डाइट दी गई, जिसमें 30% प्रोटीन, 50% कार्बोहाइड्रेट और 20% फैट शामिल था। इसके साथ हफ्ते में दो बार निगरानी में एरोबिक और रेजिस्टेंस एक्सरसाइज कराई गई, जबकि एक बार मरीज़ों ने खुद से एक्सरसाइज की। 12 हफ्तों के बाद सभी को वेट-मेंटेनेंस डाइट पर शिफ्ट कर दिया गया।
24 हफ्तों के बाद नतीजे चौंकाने वाले थे। इंटरवेंशन ग्रुप के 54% मरीज़ों (50 में से 27) की डायबिटीज रेमिशन में चली गई, जबकि सामान्य इलाज वाले ग्रुप में यह आंकड़ा सिर्फ 4% (46 में से 2) रहा। राहत की बात यह रही कि किसी गंभीर साइड-इफेक्ट का मामला सामने नहीं आया। खास बात यह रही कि शरीर की चर्बी घटी लेकिन मांसपेशियां बची रहीं, दिल की सेहत में भी सुधार दिखा और मरीज़ों ने जीवन की गुणवत्ता बेहतर होने की बात कही।
हालांकि शोधकर्ता खुद एक अहम सावधानी भी जोड़ते हैं — ट्रायल सिर्फ 24 हफ्ते चला, इसलिए यह फायदा कितने समय तक टिका रहेगा, यह अभी पता नहीं है। इतनी कम कैलोरी वाली डाइट डॉक्टर की निगरानी के बिना शुरू करना खतरनाक हो सकता है। हाल की एक स्टडी में लाइफस्टाइल बीमारियों के बढ़ते खतरे पर भी रोशनी डाली गई थी, और भारत में युवाओं में टाइप 2 डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यह स्टडी उम्मीद जगाती है, लेकिन कोई भी बड़ा बदलाव डॉक्टर की सलाह के बाद ही करें और विस्तृत जानकारी ETV Bharat की रिपोर्ट में पढ़ें।






