एक बार इस्तेमाल होने वाला सामान दोबारा मरीजों पर! केंद्र का सख्त आदेश — अस्पतालों में अब ये गलती पड़ेगी भारी

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एक बार इस्तेमाल होने वाला सामान दोबारा मरीजों पर! केंद्र का सख्त आदेश — अस्पतालों में अब ये गलती पड़ेगी भारी
कोलाज: Deccan Herald की बायोमेडिकल कचरा तस्वीर (प्रतीकात्मक) + ऑपरेशन थिएटर की प्रतिनिधि तस्वीर।

अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज को यह भरोसा होता है कि उसके लिए इस्तेमाल होने वाला सामान पूरी तरह नया और सुरक्षित है। लेकिन अब सामने आई एक सच्चाई ने इस भरोसे को हिला दिया है। सिंगल यूज मेडिकल डिवाइस यानी सिर्फ एक बार इस्तेमाल के लिए बने उपकरणों को कुछ अस्पतालों में साफ करके दोबारा इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें मिली हैं। इसके बाद केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) ने शुक्रवार 16 अक्टूबर को लिखे पत्र में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़े निर्देश दिए हैं। पत्र में बताया गया है कि कुछ निजी और कॉरपोरेट अस्पतालों में एक बार इस्तेमाल वाले उपकरणों को स्टरलाइज़ करके दोबारा लगाया जा रहा था। यह खेल खासकर कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, कार्डियोथोरेसिक व वैस्कुलर सर्जरी और न्यूरोसर्जरी जैसे गंभीर विभागों में चल रहा था। वहीं दोबारा इस्तेमाल होने वाले सामान में कार्डियक कैथेटर, गाइडवायर, बैलून व एब्लेशन कैथेटर, डायलिसिस के डायलाइज़र व ब्लड ट्यूबिंग, सर्जिकल स्टेपलर और लैप्रोस्कोपिक ट्रोकार शामिल हैं, जबकि सिरिंज और सुइयों के दोबारा इस्तेमाल की पुष्टि AiMeD ने भी की है।

सिंगल यूज मेडिकल डिवाइस दोबारा इस्तेमाल से मरीजों को क्या खतरा है

विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार इस्तेमाल के लिए बने उपकरणों को दोबारा इस्तेमाल करना सिर्फ नियम तोड़ना नहीं है। ऐसे उपकरणों को इस तरह बनाया ही नहीं जाता कि वे सफाई और दोबारा स्टरलाइज़ेशन की प्रक्रिया झेल सकें। इसलिए उनमें खराबी और काम करने की क्षमता में कमी का खतरा बढ़ जाता है। इसके बाद सबसे गंभीर खतरा क्रॉस-इन्फेक्शन का है, क्योंकि ठीक से साफ न हो पाने पर इन उपकरणों से हेपेटाइटिस बी और सी, एचआईवी तथा बैक्टीरियल संक्रमण फैल सकता है।

इस मामले का दूसरा पहलू पैसों से जुड़ा है, जो मरीजों के लिए और भी परेशान करने वाला है। DGHS के पत्र में कहा गया है कि कुछ मामलों में मरीजों से दोबारा इस्तेमाल किए गए उपकरणों की भी पूरी कीमत वसूली गई। इसके अलावा यह तरीका औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम 1940, चिकित्सा उपकरण नियम 2017 और क्लिनिकल प्रतिष्ठान अधिनियम 2010 का उल्लंघन भी माना गया है।

अब राज्यों को अस्पतालों की जांच, निगरानी और उल्लंघन पर कार्रवाई का जिम्मा दिया गया है। दिसंबर 2016 के CGHS ज्ञापन का भी इस पत्र में हवाला दिया गया है। मरीज के तौर पर आप बिल में उपकरण का नाम और कीमत जरूर जांचें। सिंगल-यूज लेबल के बारे में अस्पताल से पूछें और शक होने पर राज्य स्वास्थ्य विभाग से शिकायत करें। अधिक जानकारी के लिए Deccan Herald की रिपोर्ट पढ़ें और विटामिन D से जुड़ी हमारी खबर भी देखें।

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