क्राइस्टचर्च के हेग्ले ओवल में शनिवार 24 अक्टूबर को खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में तिलक वर्मा वर्ल्ड रिकॉर्ड के नए बादशाह बन गए। भारतीय उप-कप्तान ने न्यूजीलैंड की पारी के शुरुआती तीन ओवरों में ही दो कैच लपककर एक कैलेंडर वर्ष में सबसे ज्यादा टी20 कैच लेने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। हालांकि यह रिकॉर्ड बल्ले से नहीं, बल्कि फील्डिंग से बना है, और यही बात इसे और भी खास बनाती है। दरअसल, तिलक ने इस साल टी20 क्रिकेट में अपने कैचों की संख्या 26 तक पहुंचा दी है, जो इससे पहले किसी भी फील्डर के नाम नहीं थी।
रिकॉर्ड की शुरुआत दूसरे ओवर में हुई, जब अर्शदीप सिंह की गेंद पर न्यूजीलैंड के सलामी बल्लेबाज टिम साइफर्ट ने बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की और गेंद सीधे कवर क्षेत्र में खड़े तिलक के हाथों में चली गई। साइफर्ट महज 7 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद तीसरे ओवर में भुवनेश्वर कुमार की नकल बॉल पर डेरिल मिचेल ने फ्लिक करने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले का किनारा लेकर हवा में उठ गई और तिलक ने कवर-पॉइंट की ओर दौड़कर दूसरा कैच भी लपक लिया। मिचेल भी सिर्फ 6 रन ही बना सके, और इन दो कैचों के साथ ही तिलक ने इतिहास रच दिया।
तिलक वर्मा वर्ल्ड रिकॉर्ड: पुराना रिकॉर्ड किसके नाम था
इससे पहले एक कैलेंडर वर्ष में सबसे ज्यादा टी20 कैच का रिकॉर्ड इंडोनेशिया के डेनिल्सन हावोए के नाम था, जिन्होंने 2025 में 25 कैच लिए थे। वहीं, यूएई के मोहम्मद वसीम ने 2024 में 24 कैच लिए थे, जबकि मलेशिया के शार्विन मुनियंडी ने 2025 में 21 कैच अपने नाम किए थे। तिलक ने अब 26 कैच के साथ इस सूची में सबसे ऊपर जगह बना ली है।
इस मुकाबले की बात करें तो कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया था, और शुरुआती ओवरों में भारतीय गेंदबाजों ने मेजबान टीम पर दबाव बना दिया था। हालांकि, ग्लेन फिलिप्स और बेवन जैकब्स की शतकीय साझेदारी ने न्यूजीलैंड को संभाला, और मेजबान टीम ने पहली पारी में 180 रन बनाए। वहीं, इस मैच में चोटिल ईशान किशन की जगह वैभव सूर्यवंशी को मौका मिला था। इससे पहले पहले टी20 में भारत ने 226 रन के लक्ष्य का पीछा करके चार विकेट से जीत दर्ज की थी, जिसमें संजू सैमसन ने 33 गेंदों में 67 रन की धमाकेदार पारी खेली थी। ईशान किशन के बाहर होने और वैभव सूर्यवंशी की एंट्री की पूरी खबर यहां पढ़ें।
तिलक वर्मा की यह उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि आमतौर पर बल्लेबाजों के रिकॉर्ड सुर्खियां बटोरते हैं, लेकिन फील्डिंग में निरंतरता दिखाना उतना ही मुश्किल काम है। तिलक ने इस साल यह परीक्षा बखूबी पास की है। (स्रोत: NDTV स्पोर्ट्स)






