अक्सर हम कम सोने को सिर्फ थकान और चिड़चिड़ेपन की वजह मानते हैं, लेकिन अब एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्टडी ने साबित किया है कि कम नींद घुटने की सेहत के लिए भी उतना ही बड़ा खतरा बन सकती है। अमेरिका की Washington University के शोधकर्ताओं ने 5 लाख वयस्कों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। नतीजे में पाया गया कि रात में 6 घंटे से कम सोने वालों में घुटने की ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा 41 प्रतिशत तक ज़्यादा था। बार-बार अनिद्रा का शिकार होने वालों और रात की पाली में काम करने वालों में भी यह खतरा बढ़ा हुआ पाया गया।
यह शोध ब्रिटेन के UK Biobank के लगभग 5 लाख प्रतिभागियों (औसत उम्र 58 साल) पर 8 से 13 साल तक नज़र रखकर किया गया। इसके नतीजे Arthritis Care & Research जर्नल में प्रकाशित हुए (स्रोत: mindbodygreen, Medical Xpress)।आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
7 घंटे सोने वालों की तुलना में 6 घंटे से कम सोने वालों में घुटने की ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा 41 प्रतिशत और जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी का खतरा 31 प्रतिशत ज़्यादा मिला। अक्सर अनिद्रा से जूझने वालों में घुटने की सर्जरी का खतरा 40 प्रतिशत बढ़ा पाया गया। रात की पाली (रात 12 से सुबह 6 बजे) में काम करने वालों में भी घुटने की बीमारी का खतरा 24 प्रतिशत ज़्यादा दर्ज किया गया। हालांकि वज़न को हिसाब में लेने के बाद भी ये लिंक बने रहे, यानी खराब नींद का असर सिर्फ वज़न बढ़ने की वजह से नहीं था।
कम नींद घुटने की कार्टिलेज को कैसे कमज़ोर करती है
दरअसल हमारे घुटनों की कार्टिलेज दिन-रात के चक्र के हिसाब से काम करती है। दिनभर यह बोझ सहती है और रात में खुद को ठीक करती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कार्टिलेज की कोशिकाओं का अपना आंतरिक घड़ी-तंत्र होता है, और जब यह बिगड़ता है तो कार्टिलेज टूटने लगती है। इसके बाद यह भी पाया गया कि यह असर घुटने पर कूल्हे से ज़्यादा दिखा, यानी घुटना शरीर की आंतरिक घड़ी पर ज़्यादा निर्भर हो सकता है।
क्या नींद सुधारने से जोड़ों को फायदा मिलेगा?
हालांकि यह एक ऑब्ज़र्वेशनल अध्ययन है, यानी इसने नींद और जोड़ों की बीमारी के बीच लिंक पाया है, लेकिन यह साबित नहीं करता कि खराब नींद ही बीमारी की असली वजह बनती है। विशेषज्ञ 7 घंटे की नींद को सेहतमंद सीमा मानते हैं और रोज़ एक ही समय पर सोने-उठने की सलाह देते हैं। अगर अनिद्रा बार-बार हो रही है तो डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें, क्योंकि नींद सुधारना जोड़ों के लंबे स्वास्थ्य का भी नया रास्ता हो सकता है। नींद और सेहत के लिंक पर पहले भी बड़ी रिसर्च आई है — रातभर नींद नहीं आती? स्ट्रोक का खतरा 26% ज्यादा! 13 लाख लोगों की स्टडी में बड़ा खुलासा।






