66 नंबर पर पूर्वी भारत! कोलकाता ने मारी बाज़ी, जानें देश की सेहत का पूरा रिपोर्ट कार्ड

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66 नंबर पर पूर्वी भारत! कोलकाता ने मारी बाज़ी, जानें देश की सेहत का पूरा रिपोर्ट कार्ड
फोटो: WHO / डीएनए इंडिया | स्वस्थ जीवनशैली और सुबह की सैर की तस्वीरें

देश की सेहत का ताजा रिपोर्ट कार्ड सामने आ गया है, और इंडिया हेल्थ क्वोशेंट 2026 की रिपोर्ट में पूर्वी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है। मणिपालसिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस की ओर से जारी इस स्टडी में पूर्वी भारत को 100 में से 66 अंक मिले हैं, जो देश के औसत 65 अंक से एक अंक ज्यादा है। इस सर्वे में 16 शहरों के 2600 शहरी लोगों की राय ली गई, जिसमें शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, पेशेवर और सामाजिक सेहत जैसे पांच पहलुओं को मापा गया। हालांकि इसमें कोलकाता ने आर्थिक सेहत में सबसे आगे रहकर ध्यान खींचा है।

दरअसल, यह स्टडी यूगव की ओर से मणिपालसिग्ना के लिए की गई, जिसमें कोलकाता के साथ गुवाहाटी, पटना और भुवनेश्वर जैसे पूर्वी शहरों के लोग भी शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में शारीरिक सेहत सबसे मजबूत पहलू रही, जिसे 68 अंक मिले, जबकि आर्थिक सेहत 62 अंक के साथ सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई। वहीं पूर्वी भारत में तस्वीर थोड़ी बेहतर रही, क्योंकि यहां आर्थिक सेहत को 63 अंक मिले, जो राष्ट्रीय औसत से एक अंक ज्यादा है, और इसके साथ मानसिक सेहत को 66 तथा सामाजिक सेहत को 67 अंक मिले।

इंडिया हेल्थ क्वोशेंट 2026: पूर्वी भारत क्यों रहा आगे

रिपोर्ट में कोलकाता की खासियत साफ तौर पर उभरकर सामने आई है, क्योंकि यहां 28 प्रतिशत लोगों ने आर्थिक सेहत को अपनी कुल सेहत का सबसे अहम पहलू बताया, जबकि पूर्व के दूसरे शहरों में यह आंकड़ा 20 प्रतिशत रहा। इसके अलावा कोलकाता में आधे लोगों ने रिटायरमेंट की योजना पर खास ध्यान दिया, जबकि दूसरे क्षेत्रों में यह आंकड़ा 41 प्रतिशत रहा, जिससे पता चलता है कि यहां के लोग भविष्य की आर्थिक तैयारी को लेकर ज्यादा गंभीर हैं।

इस रिपोर्ट का एक और अहम नतीजा हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ा है, जिसमें बीमा वाले लोगों का स्कोर 68 अंक रहा, जबकि बिना बीमा वाले लोगों का स्कोर 62 अंक पर अटका रहा। हालांकि यह फर्क हर उम्र, लिंग और तनाव के स्तर पर एक जैसा बना रहा, जिससे यह साफ होता है कि आर्थिक सुरक्षा और सेहत का सीधा रिश्ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक सिर्फ बीमा काफी नहीं है, नियमित व्यायाम और संतुलित खानपान भी जरूरी है।

इस रिपोर्ट से आम लोगों के लिए सबसे बड़ा संदेश यही है कि सेहत सिर्फ बीमारी न होने का नाम नहीं है, बल्कि शारीरिक, मानसिक और आर्थिक पहलुओं का संतुलन ही असली सेहत है। सेहत से जुड़ी आदतों में छोटे-छोटे बदलाव कितना बड़ा फर्क ला सकते हैं, इस पर हमने पहले भी खबरें प्रकाशित की हैं, और आप सनस्क्रीन लगाने वालों की बढ़ती संख्या और सेहत के ट्रेंड की खबर भी पढ़ सकते हैं। पूरी रिपोर्ट यहां देख सकते हैं, हालांकि हेल्थ फैसले से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

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