38 साल का इंतजार खत्म! हरियाणा की बेटी ने रचा इतिहास, जानें कौन है वो धाकड़ पहलवान

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38 साल का इंतजार खत्म! हरियाणा की बेटी ने रचा इतिहास, जानें कौन है वो धाकड़ पहलवान
मनीषा भानवाला (फोटो: स्पोर्ट्सडाइजेस्ट और क्रिकेटनमोर से साभार)

भारतीय कुश्ती के इतिहास में शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया, क्योंकि मनीषा भानवाला ने वह कारनामा कर दिखाया जिसका इंतजार देश को 38 साल से था। कजाकिस्तान के अस्ताना में खेली गई वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के फाइनल में उन्होंने अमेरिका की एबिगेल नेट को 8-6 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। हालांकि मुकाबला आखिरी सेकंड तक रोमांचक रहा, वहीं मनीषा ने दबाव में भी अपना धैर्य नहीं खोया और जीत की पटकथा लिख दी। दरअसल यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं है, बल्कि भारतीय महिला कुश्ती के लिए एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।

मनीषा भानवाला की ऐतिहासिक जीत का सफर

59 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में मनीषा ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और विरोधी पहलवान पर लगातार दबाव बनाए रखा। इसके बाद मुकाबला बराबरी पर पहुंचा, लेकिन आखिरी क्षणों में उन्होंने निर्णायक अंक बटोरकर 8-6 की जीत पक्की कर ली। वहीं इस जीत के साथ वह वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बन गईं। हालांकि इससे पहले भारत के खाते में इस प्रतियोगिता का सिर्फ एक ही स्वर्ण था, जो सुशील कुमार ने 2010 में पुरुषों के 66 किलोग्राम वर्ग में जीता था।

हरियाणा के जींद जिले के छोटे से गांव सीवा की रहने वाली मनीषा की कहानी संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। उनके पिता सुरेश चाहते थे कि बेटी खेल के जरिए फिट रहे, इसलिए उन्होंने शुरुआत में मनीषा को कबड्डी में दाखिला दिलाया, लेकिन बाद में वह कुश्ती की ओर मुड़ गईं। इसके बाद पिता का 2022 में अचानक निधन हो गया, वह भी ठीक उसी दिन जब मनीषा एशियन चैंपियनशिप के लिए मंगोलिया रवाना होने वाली थीं। हालांकि इस सदमे ने उन्हें तोड़ने के बजाय और मजबूत बना दिया, वहीं भाई रिंकू हर कदम पर उनकी सबसे बड़ी ताकत बने रहे।

मनीषा ने 62, 65 और 57 किलोग्राम भार वर्गों में भी हाथ आजमाया, लेकिन सबसे बड़ी सफलता उन्हें नॉन-ओलंपिक 59 किलोग्राम वर्ग में मिली। दरअसल कोच वीरेंदर दहिया की सलाह पर उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप पर पूरा ध्यान केंद्रित किया, और इसका फायदा फाइनल में साफ दिखा। इसके बाद अब उनकी नजरें 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर हैं, जहां वह 57 किलोग्राम वर्ग में पदक जीतना चाहती हैं। वहीं इसी चैंपियनशिप में नीलम सिरोही और काजल धोचक को रजत, जबकि तनु शर्मा को कांस्य पदक मिला।

इस ऐतिहासिक जीत के बाद देश भर से मनीषा को बधाइयां मिल रही हैं,। भारतीय कुश्ती से जुड़ी ऐसी ही प्रेरणादायक कहानियों के लिए आप हमारी यह खास रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं, और इस जीत की पूरी जानकारी एबीपी लाइव की इस खबर में भी देखी जा सकती है।

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