क्रिकेट के चाहने वालों के लिए रविवार 1 नवंबर का दिन इसलिए खास है, क्योंकि आज दुनियाभर में पहली बार आईसीसी क्रिओ डे मनाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने इस नए वार्षिक उत्सव की शुरुआत उस मौके पर की है, जब उसका शुरुआती स्तर का कार्यक्रम क्रिओ दुनियाभर में दस लाख प्रतिभागियों तक पहुंच गया है। दरअसल यह कार्यक्रम 2021 में शुरू हुआ था, और इसका मकसद नए लोगों तक क्रिकेट पहुंचाना है, चाहे वे किसी भी देश, उम्र या पृष्ठभूमि के हों।
इस उपलब्धि की सबसे भावुक कहानी नाइजीरिया से जुड़ी है, जहां लागोस की 13 साल की सैदात हमज़त इस कार्यक्रम की दस लाखवीं प्रतिभागी बनी हैं। वहीं सैदात को पहले क्रिकेट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन उनके स्कूल में हुए क्रिओ उत्सव ने उन्हें इस खेल से जोड़ दिया, और अब वे कहती हैं कि क्रिकेट ने उनकी जिंदगी बदल दी है। इसके अलावा क्रिओ कार्यक्रम 18 भाषाओं में मुफ्त और लचीला पाठ्यक्रम देता है, ताकि नए खिलाड़ी अपनी सुविधा के अनुसार खेल सीख सकें।
आईसीसी क्रिओ डे से जुड़े बड़े आंकड़े और मकसद
आंकड़ों की बात करें तो यह कार्यक्रम 65 से ज्यादा आईसीसी एसोसिएट सदस्यों तक पहुंच चुका है, जबकि सभी 12 पूर्ण सदस्यों के पास प्रमाणित क्रिओ प्रशिक्षक हैं। वहीं इसमें लड़कियों और महिलाओं की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है, जो खेल में बराबरी की दिशा में एक बड़ी बात मानी जा रही है। इसके अलावा अफ्रीका इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा महाद्वीप बनकर उभरा है, जहां चार लाख से ज्यादा प्रतिभागी जुड़े हैं, जबकि ब्राजील में करीब दो लाख और भूटान में एक लाख से ज्यादा लोग इस पहल का हिस्सा बने हैं। दरअसल आईसीसी के आधिकारिक लॉजिस्टिक्स साझेदार डीपी वर्ल्ड ने भी इसमें मदद की है, जिसके जरिए करीब पांच हजार क्रिकेट सेट बांटे गए हैं, ताकि संसाधनों की कमी किसी बच्चे के रास्ते में न आए।
आगे की राह को देखें तो आईसीसी के सीईओ संजोग गुप्ता ने कहा है कि पांच साल में दस लाख तक पहुंचना इस बात का सबूत है कि सही निवेश और सामूहिक कोशिश से खेल की पहुंच कितनी बढ़ सकती है। दुनिया के पहले गेंदबाज़ के 200 टी20 विकेट के रिकॉर्ड से जुड़ी हमारी यह खबर आप यहां पढ़ सकते हैं, और क्रिओ डे की पूरी जानकारी आईसीसी की इस खबर में भी दी गई है। हालांकि पहला क्रिओ डे आज एक डिजिटल अभियान के रूप में मनाया जा रहा है, लेकिन इसका असली मकसद अगले दस लाख खिलाड़ियों को प्रेरित करना है, ताकि क्रिकेट सच में हर किसी के लिए, हर जगह, कभी भी खेला जा सके।






