नमक खा रहे हैं, फिर भी कमी! हर तीसरे ग्रामीण परिवार के नमक में आयोडीन की ये चौंकाने वाली हकीकत

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नमक खा रहे हैं, फिर भी कमी! हर तीसरे ग्रामीण परिवार के नमक में आयोडीन की ये चौंकाने वाली हकीकत
तस्वीर साभार: प्रेस स्रोतों से (प्रतीकात्मक)

चेन्नई के एक मेडिकल संस्थान के अध्ययन ने तमिलनाडु के गांवों को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने रखी है, क्योंकि वहां आयोडीन की कमी अब भी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। दरअसल, ग्रामीण इलाकों में लोग रोजाना औसतन 13 ग्राम नमक खाते हैं, लेकिन इसके बावजूद हर तीसरे ग्रामीण परिवार के नमक में पर्याप्त आयोडीन नहीं पाया गया है। वहीं स्वास्थ्य मंत्री के. जी. अरुणराज ने सोमवार 26 अक्टूबर को आयोजित एक कार्यक्रम में यह जानकारी साझा की, जिसमें आयोडीन की कमी को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस साल अब तक 6,576 नमक के नमूनों की जांच की गई है, जिनमें से 5,784 नमूनों यानी 87.9 प्रतिशत में 15 ppm से ज्यादा आयोडीन मिला है। दरअसल, 777 नमूनों यानी 11.8 प्रतिशत में आयोडीन 15 ppm से कम पाया गया, जबकि 15 नमूनों यानी 0.2 प्रतिशत में बिल्कुल आयोडीन नहीं था। वहीं गांवों की स्वास्थ्य नर्सें घर-घर जाकर नमक की जांच भी कर रही हैं और स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

आयोडीन की कमी: घेंघा और बच्चों पर असर

आयोडीन की कमी से थायरॉयड ग्रंथि ठीक से काम नहीं कर पाती, जिससे घेंघा यानी गले की ग्रंथि का बढ़ना जैसी समस्या सामने आती है। दरअसल, मदुरै, विल्लुपुरम, तंजावुर, रामनाथपुरम और पुदुक्कोट्टई जैसे जिलों में घेंघे के कई मामले मिले हैं, इसलिए इन्हें निगरानी वाले जिलों में रखा गया है। वहीं स्कूली बच्चों की जांच के अलग-अलग वर्षों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं, क्योंकि रामनाथपुरम में 2024-25 में 9 प्रतिशत, विल्लुपुरम में 2018-19 में करीब 9 प्रतिशत, मदुरै में 2022-23 में 6 प्रतिशत और पुदुक्कोट्टई में 2024-25 में 5 प्रतिशत बच्चों में घेंघा पाया गया।

आयोडीन शरीर के लिए बहुत कम मात्रा में जरूरी होता है, लेकिन थायरॉयड हार्मोन बनाने में इसकी भूमिका बेहद अहम है। दरअसल, ये हार्मोन बच्चों की बढ़त और दिमाग के विकास को नियंत्रित करते हैं, इसलिए कमी से बच्चों के विकास पर असर पड़ सकता है और गर्भवती महिलाओं में गर्भपात का खतरा भी बढ़ सकता है। वहीं कुछ अध्ययनों में आयोडीन की कमी वाले समुदायों में बच्चों का औसत IQ 10 से 15 अंक तक कम पाए जाने का भी जिक्र किया गया है, जो इस समस्या की गंभीरता को दिखाता है।

इस दोहरी समस्या का समाधान यही है कि नमक की मात्रा घटाई जाए, लेकिन नमक सिर्फ आयोडाइज्ड ही इस्तेमाल किया जाए। दरअसल, मंत्री ने साफ कहा है कि रोजाना 5 ग्राम से कम नमक लेना चाहिए, लेकिन वह नमक आयोडाइज्ड ही होना चाहिए, ताकि नमक घटाने के चक्कर में आयोडीन की कमी और न बढ़े। स्मॉग से बच्चों के फेफड़ों पर असर वाली खबर यहां पढ़ें। अधिक जानकारी के लिए न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट देखें।

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