गर्मी चुपचाप बढ़ा रही है ये बड़ा खतरा! WHO ने मां-बच्चे के लिए जारी किया पहला ग्लोबल पैमाना — जानें 2 चौंकाने वाले आंकड़े

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गर्मी चुपचाप बढ़ा रही है ये बड़ा खतरा! WHO ने मां-बच्चे के लिए जारी किया पहला ग्लोबल पैमाना — जानें 2 चौंकाने वाले आंकड़े
गर्मी से गर्भवती महिलाओं और नवजातों को सबसे ज्यादा खतरा होता है। फोटो: TopLine MD / PulseIt News

गर्भावस्था में गर्मी का खतरा अब सिर्फ गर्मी की शिकायत नहीं रहा, बल्कि दुनिया की चार बड़ी संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने इसे मापने और रोकने के लिए पहला ग्लोबल पैमाना जारी कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO), यूनिसेफ और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने 21 अक्टूबर को यह फ्रेमवर्क लॉन्च किया है। इसका मकसद यह है कि देश यह गिन सकें कि बढ़ती गर्मी गर्भवती महिलाओं, नवजातों और छोटे बच्चों की सेहत पर कितना असर डाल रही है। हालांकि अब तक इस खतरे को लेकर आंकड़े बिखरे हुए थे, और इसी वजह से स्वास्थ्य व्यवस्थाएं समय पर कदम नहीं उठा पा रही थीं।

WHO के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहने से समय से पहले जन्म (प्रीटर्म बर्थ) की आशंका 26 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। वहीं, एक साल से कम उम्र के बच्चों ने 2024 में 1986-2005 के औसत की तुलना में 389 प्रतिशत ज्यादा हीटवेव वाले दिन झेले हैं। इसके अलावा, दुनिया भर में करीब 1.5 अरब बच्चे ऐसी हीटवेव की चपेट में हैं, जो अब पहले से ज्यादा बार, ज्यादा देर तक और ज्यादा तेज आ रही हैं। दरअसल, छोटे बच्चों का शरीर तापमान को संभालने में अभी पूरी तरह सक्षम नहीं होता, इसलिए वे गर्मी के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं।

गर्भावस्था में गर्मी: कौन से संकेत गिने जाएंगे

नए फ्रेमवर्क में देशों से कहा गया है कि वे अत्यधिक गर्मी के दौरान समय से पहले जन्म, मृत जन्म (स्टिलबर्थ), कम वजन वाले नवजात, गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप, बच्चों की मौत और अस्पतालों में मरीजों की संख्या पर नजर रखें। इसके साथ-साथ स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति को भी एक संकेत माना गया है, क्योंकि इससे पता चलता है कि गर्मी बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी को कितना बाधित कर रही है। वहीं, स्वास्थ्य रिकॉर्ड को तापमान के आंकड़ों से जोड़कर अधिकारी यह भी पहचान सकेंगे कि कौन से इलाके और समुदाय सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।

विशेषज्ञों की सलाह है कि गर्भवती महिलाएं गर्मी में पर्याप्त पानी पिएं, लंबे समय तक तेज धूप में न रहें और हवादार व ठंडी जगह पर आराम करें। इसके बाद भी अगर चक्कर, कमजोरी या बच्चे की हलचल में बदलाव महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। हालांकि यह फ्रेमवर्क किसी एक बीमारी का कारण साबित नहीं करता, लेकिन यह स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पहले से तैयार रहने, चेतावनी जारी करने और हीट-हेल्थ एक्शन प्लान बनाने में मदद करेगा। यही वजह है कि एजेंसियों ने सभी देशों से स्थानीय जरूरतों के हिसाब से ऐसी योजनाएं लागू करने की अपील की है।

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