स्लीप एपनिया नाम की बीमारी भारतीय अर्थव्यवस्था को हर साल करीब 2 से 3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा रही है। इंटरनेशनल सर्जिकल स्लीप सोसाइटी (ISSS) 2026 की बैठक में सर्जरी जगत के दिग्गजों की ओर से यही गंभीर निष्कर्ष सामने आया है। एम्स के एक अध्ययन के अनुसार देश की कामकाजी उम्र के करीब 10.4 करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं।
बैठक की अध्यक्षता करने वाले डॉ. विकास अग्रवाल, जिन्हें भारत में स्लीप सर्जरी का जनक माना जाता है, ने कहा कि स्लीप एपनिया पूरी तरह इलाज योग्य बीमारी है। इसके बावजूद देश में हर तीसरे व्यक्ति को इससे जुड़ी कोई न कोई समस्या है। विशेषज्ञों के अनुसार अनुपचारित मामलों में उत्पादकता में 77 प्रतिशत तक की गिरावट और हर कर्मचारी के 13 अतिरिक्त बीमारी वाले दिन इसी विकार का नतीजा हैं।
स्लीप एपनिया के लक्षण क्या हैं
दरअसल, यह नींद से जुड़ा एक ऐसा विकार है जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुक जाती है। तेज खर्राटे, दिन में थकान और नींद खुलने पर सिरदर्द इसके प्रमुख लक्षण हैं। लंबे समय तक अनुपचारित रहने पर यह दिल की बीमारियों, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ा देता है।
चौंकाने वाला तथ्य यह है कि भारत में सड़क हादसों के करीब 40 प्रतिशत मामलों के पीछे भी खराब नींद को जोड़ा जा रहा है। लंबे घंटों काम करने वाले डॉक्टरों और ड्राइवरों में त्रुटियों की दर शराब के नशे जैसी ही पाई गई है। यही वजह है कि चिकित्सकों ने जागरूकता और बीमा कवर बढ़ाने की मांग तेज कर दी है।
हालांकि, राहत की बात यह भी है कि इसका इलाज पूरी तरह संभव है। सम्मेलन में मौजूद न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और पद्मश्री सम्मानित डॉ. मिलिंद किरताने और डॉ. मोहन कामेश्वरन समेत कई दिग्गजों ने इस बात पर जोर दिया। विशेषज्ञों की सलाह है कि खर्राटों को सामान्य न समझें और समय पर डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।
अच्छी नींद सेहत की नींव है, इस पर हमारी विटामिन डी से जुड़ी यह रिपोर्ट भी पढ़ें। इस अध्ययन की विस्तृत जानकारी एनडीटीवी हेल्थ की रिपोर्ट में उपलब्ध है।






