आपका दिमाग सिकुड़ रहा है? 30-40 की उम्र में विटामिन D का ये खुलासा जानकर चौंक जाएंगे

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आपका दिमाग सिकुड़ रहा है? 30-40 की उम्र में विटामिन D का ये खुलासा जानकर चौंक जाएंगे
सुबह की धूप में योग और सैर — विटामिन D के प्राकृतिक स्रोत। फोटो क्रेडिट: medikstat / retiredinamerica.com

विटामिन D को लेकर एक नई स्टडी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, आपकी 30 और 40 की उम्र में विटामिन D का लेवल यह तय कर सकता है कि 20 साल बाद आपका दिमाग कितना स्वस्थ रहेगा। दरअसल, आयरलैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ गॉलवे के वैज्ञानिकों ने करीब 800 लोगों पर 16 साल तक अध्ययन किया, जिसमें मिडलाइफ में विटामिन D का उच्च स्तर रखने वालों के दिमाग में बाद में टाउ प्रोटीन काफी कम पाया गया।

क्या है टाउ प्रोटीन और यह क्यों खतरनाक है

टाउ एक ऐसा प्रोटीन है जो गलत तरीके से मुड़कर दिमाग में गांठें बना लेता है। यही गांठें अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों की प्रमुख वजह मानी जाती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये गांठें न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे दिमाग सिकुड़ने (एट्रॉफी) लगता है और याददाश्त कमजोर होती है। हालांकि, स्टडी में विटामिन D और एमिलॉयड बीटा प्रोटीन के बीच ऐसा कोई संबंध नहीं मिला, जिससे पता चलता है कि विटामिन D खास तौर पर टाउ से जुड़ी प्रक्रिया पर ही असर डाल सकता है।

भारतीयों के लिए क्यों है यह बड़ी चेतावनी

भारत के लिए ये नतीजे इसलिए और भी गंभीर हैं क्योंकि यहां 70 से 90% लोग विटामिन D की कमी से जूझ रहे हैं। Journal of Family Medicine and Primary Care में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, गहरी त्वचा (मेलानिन) प्राकृतिक सनब्लॉक की तरह काम करती है, इसलिए भारतीयों को उतना ही विटामिन D बनाने के लिए ज्यादा धूप की जरूरत होती है। वहीं, हैदराबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) की स्टडी में भी विटामिन D की कमी और मिडल-एज भारतीयों में कमजोर एक्जीक्यूटिव फंक्शन के बीच सीधा संबंध पाया गया है।

विटामिन D का लेवल सही रखने के आसान तरीके

शोधकर्ताओं के अनुसार 30-40 की उम्र ‘गोल्डन विंडो’ है — इस दौरान विटामिन D का लेवल सही रखकर भविष्य के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसके लिए रोज सुबह 20-30 मिनट धूप में रहना सबसे आसान और असरदार तरीका है। इसके अलावा अंडे, मछली, मशरूम और फोर्टिफाइड दूध जैसे आहार भी मददगार साबित हो सकते हैं। वहीं, स्टडी के लेखक मार्टिन डेविड मुलिगन ने स्पष्ट किया है कि यह नतीजा संबंध (association) दर्शाता है, कारण-परिणाम (causation) साबित नहीं करता — इसलिए इसकी पुष्टि के लिए और शोध की जरूरत है।

किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है

विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग दिनभर घर या ऑफिस में बंद रहते हैं, जिनकी त्वचा गहरी है और जो प्रदूषित शहरों में रहते हैं, उनमें विटामिन D की कमी का खतरा सबसे ज्यादा होता है। भारत में यही तीनों स्थितियां आम हैं, इसलिए यहां खतरा दोगुना हो जाता है। अगर आपको बार-बार थकान, हड्डियों में दर्द या मूड खराब रहने की शिकायत है, तो एक बार विटामिन D का ब्लड टेस्ट जरूर करवाएं। सप्लीमेंट हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लें, क्योंकि बिना सलाह के ज्यादा मात्रा लेना भी सेहत के लिए ठीक नहीं है।

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स्रोत: NDTV Health

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