हर साल 18 अक्टूबर को वर्ल्ड मेनोपॉज डे मनाया जाता है, और इस साल यानी रविवार 18 अक्टूबर 2026 को इसकी थीम है ‘Chronic Pain at Midlife’। इस मौके पर आई एक नई स्टडी ने 40 से ऊपर की महिलाओं के लिए चौंकाने वाला खुलासा किया है। स्टडी के मुताबिक, नॉर्मल BMI वाली महिलाओं का बॉडी फैट मेनोपॉज के बाद बिना वजन बढ़े 24.8% से 28.8% तक पहुंच गया। यानी तराजू पर नंबर वही रहे, लेकिन शरीर के अंदर फैट जमा होने का पूरा गणित बदल गया।
वर्ल्ड मेनोपॉज डे 2026: मेनोपॉज के बाद क्यों नहीं काम करती पुरानी डाइट?
दरअसल, पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में हॉर्मोन्स तेजी से बदलते हैं। इसके साथ ही उम्र बढ़ने के कारण मांसपेशियां घटने लगती हैं और नींद भी डिस्टर्ब रहती है। इन सबका सीधा असर शरीर के फैट स्टोर करने के तरीके पर पड़ता है। यही वजह है कि पुरानी डाइट या एक्सरसाइज अब असर नहीं दिखाती। हालांकि घबराएं नहीं — बस फिटनेस की स्ट्रैटेजी बदलने का वक्त आ गया है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस उम्र में लक्ष्य सिर्फ वजन घटाना नहीं होना चाहिए। हड्डियों की मजबूती, मांसपेशियों को बचाए रखना और मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखना अब ज्यादा अहम है। वहीं नींद की क्वालिटी सुधारना भी जरूरी है, क्योंकि खराब नींद हॉर्मोनल बैलेंस बिगाड़ती है। योग इस दौर का सबसे भरोसेमंद साथी है — 13 ट्रायल्स (1306 प्रतिभागियों) की एक रिसर्च में पाया गया कि योग से हॉट फ्लैशेज कम हुए, मूड बेहतर हुआ और नींद भी सुधरी।
वेलनेस एक्सपर्ट डॉ. नरेंद्र के. शेट्टी सलाह देते हैं कि 40 की उम्र से ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। शुरुआत में हफ्ते में दो योग क्लास लें और धीरे-धीरे इसे रोज की आदत बनाएं। ब्रिज पोज, लेग्स-अप-द-वॉल पोज, सूर्य नमस्कार और शवासन जैसे आसन शरीर की अकड़न दूर करते हैं। वहीं एरोबिक एक्सरसाइज भी बेहद फायदेमंद है — यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की स्टडी में पाया गया कि हफ्ते में तीन बार 30 मिनट की वॉक या जुंबा क्लास से डिप्रेशन कम हुआ और क्वालिटी ऑफ लाइफ बेहतर हुई।
इस साल की थीम ‘Chronic Pain at Midlife’ जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द पर फोकस करती है, जो मेनोपॉज की सबसे अनदेखी समस्या मानी जाती है। एस्ट्रोजन के घटने से जोड़ों और लिगामेंट्स पर असर पड़ता है, जिससे दर्द की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। हालांकि लगातार या बढ़ता दर्द ‘सिर्फ उम्र का असर’ मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर दर्द काम, नींद या रोजमर्रा की जिंदगी में दखल दे रहा है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। सेहत से जुड़ी ऐसी ही खबरों के लिए हमारे लाइफस्टाइल सेक्शन की यह स्टडी भी पढ़ें, और Jagran की इस रिपोर्ट में पूरी स्टडी की डिटेल देखी जा सकती है।






