आज रात 11:51 बजे ISRO का बड़ा मिशन! भारत का अपना GPS होगा और मजबूत, जानें NVS-03 की खासियत

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आज रात 11:51 बजे ISRO का बड़ा मिशन! भारत का अपना GPS होगा और मजबूत, जानें NVS-03 की खासियत
GSLV रॉकेट और NavIC उपग्रह की झलक। फोटो साभार: ISRO / TelecomTalk

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) शुक्रवार, 30 अक्टूबर की रात 11:51 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से NVS-03 लॉन्च करने जा रहा है। यह नेविगेशन उपग्रह GSLV-F18 रॉकेट के जरिए जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा, जिससे भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली NavIC और मजबूत होगी। हालांकि, यह मिशन पहले 15 से 20 अक्टूबर के बीच प्रस्तावित था, लेकिन एहतियाती तैयारियों के चलते अब इसे महीने के आखिरी दिन लॉन्च किया जा रहा है। दरअसल, यह इस साल की चुनौतियों के बाद ISRO की वापसी का एक अहम कदम माना जा रहा है।

NVS-03 दूसरी पीढ़ी के NavIC उपग्रहों की श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है, जिसे भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली (IRNSS) की सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है। इस उपग्रह में स्वदेशी परमाणु घड़ी के साथ-साथ खरीदी गई परमाणु घड़ियां भी लगी हैं, जो सटीक समय और स्थिति की जानकारी देने में मदद करेंगी। इसमें L5 और S बैंड के साथ नया L1 बैंड भी है, जिससे आम मोबाइल में NavIC का इस्तेमाल आसान होगा। यह प्रणाली भारत और सीमा से 1500 किलोमीटर तक सेवा देगी।

NVS-03 लॉन्च: GSLV की 20वीं उड़ान और NavIC का भविष्य

यह मिशन GSLV रॉकेट की 20वीं उड़ान होगी, और ISRO प्रमुख वी. नारायणन के अनुसार इस लॉन्च को लेकर सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। हालांकि, इस साल की शुरुआत में PSLV की लगातार दो विफलताओं के बाद ISRO ने हर लॉन्च में अतिरिक्त सावधानी बरतने का फैसला किया है, जिसकी वजह से कई मिशनों के समय में बदलाव हुआ है। सितंबर में GSLV से EOS-05 की सफल उड़ान ने NVS-03 के लिए रास्ता साफ किया था।

NavIC, यानी भारतीय नक्षत्र के साथ नेविगेशन, भारत की अपनी क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली है, जो GPS जैसे विदेशी सिस्टम पर निर्भरता कम करती है। इस प्रणाली के तहत NVS-01 से NVS-05 तक पांच दूसरी पीढ़ी के उपग्रहों की योजना है, जिनमें से NVS-03 अब लॉन्च हो रहा है और NVS-04 व NVS-05 भी उन्नत चरण में तैयार हो रहे हैं। L1 बैंड से NavIC आम स्मार्टफोन में भी बेहतर काम करेगा, और यह प्रणाली रक्षा, आपदा प्रबंधन व परिवहन के लिए सटीक लोकेशन सेवा देती है। तकनीक की अन्य खबरें यहां पढ़ें।

इस लॉन्च का सीधा प्रसारण ISRO के यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया पर देखा जा सकेगा, जिससे देशभर के लोग इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बन सकेंगे। लॉन्च के बाद उपग्रह के कक्षा में स्थापित होने और सेवाएं शुरू करने में कुछ समय लगेगा। फिर भी यह मिशन भारत की अंतरिक्ष आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है। पूरी खबर का स्रोत: The Economic Times।

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