गुरुवार 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस के मौके पर इंदौर में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ऐसी चेतावनी दी है जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है, क्योंकि भारत में दिल की बीमारी का जोखिम अब पश्चिमी देशों की तुलना में करीब 10 साल पहले ही बढ़ रहा है। दरअसल, विशेषज्ञों के मुताबिक आज हर 5 में से 1 हार्ट अटैक मरीज की उम्र 20 से 40 साल के बीच है, वहीं बैठे रहने की आदत, गलत खानपान, मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी इस खतरे को लगातार बढ़ा रही है।
वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के अध्यक्ष और मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जगत नरूला ने बताया कि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल अक्सर बिना लक्षणों के ही शरीर में पनपते रहते हैं, वहीं अचानक दिल का दौरा पड़ने तक मरीज को इनका पता ही नहीं चलता। इसके बाद हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश जैन ने चेताया कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल की अनदेखी ही युवाओं में दिल की बीमारी की सबसे बड़ी वजह बन रही है। दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि इन बड़े जोखिम कारकों को नियंत्रित करके समय से पहले होने वाले करीब 80 फीसदी हार्ट अटैक और स्ट्रोक को रोका जा सकता है।
दिल की बीमारी जोखिम से बचने के 5 आसान तरीके
दिल को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है, क्योंकि नियमित व्यायाम वजन, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल तीनों को संतुलित रखता है। वहीं खानपान में चीनी, नमक और तले हुए भोजन की मात्रा कम करना भी उतना ही अहम है, जबकि बच्चों के शुरुआती दो सालों में अतिरिक्त चीनी से पूरी तरह बचना चाहिए। इसके बाद धूम्रपान से दूरी और तंबाकू छोड़ने के लिए मदद लेना भी दिल और स्ट्रोक दोनों के खतरे को घटाता है, वहीं नियमित जांच से छिपी हुई बीमारियों का समय पर पता चल जाता है।
आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को साफ दिखाते हैं, क्योंकि दुनियाभर में हर साल करीब 2 करोड़ मौतें दिल की बीमारी से होती हैं, जो कुल मौतों का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। वहीं भारत में तंबाकू की वजह से स्ट्रोक से होने वाली मौतों में 12 फीसदी का योगदान है, जबकि हाई ब्लड प्रेशर अकेले 56 फीसदी स्ट्रोक मौतों के पीछे है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता से आगे बढ़कर अब सुलभ इलाज, धूम्रपान छोड़ने में मदद और नियमित जांच की व्यवस्था ही इस बोझ को कम कर सकती है।
दिल की सेहत से जुड़ी हमारी पहले की खबर अमीर लोगों में दिल के खतरे वाली स्टडी भी पढ़ें, वहीं विशेषज्ञों की पूरी चेतावनी Free Press Journal की रिपोर्ट में विस्तार से दी गई है।






