पटाखों से भी खतरनाक ये देसी जुगाड़! दिवाली से पहले कार्बाइड गन पर बड़ा फैसला — जानें बच्चों की आंखों पर क्यों खतरा

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पटाखों से भी खतरनाक ये देसी जुगाड़! दिवाली से पहले कार्बाइड गन पर बड़ा फैसला — जानें बच्चों की आंखों पर क्यों खतरा
फोटो: iStock/Deccan Herald (दिवाली पटाखे), Shutterstock (आंखों की जांच) | कोलाज: TheFocusWorld

दिवाली का त्योहार नजदीक है और बाजारों में पटाखों की रौनक बढ़ने लगी है। लेकिन पटाखों के साथ एक खतरनाक देसी जुगाड़ भी बच्चों के हाथों में पहुंच रहा है — कार्बाइड गन। दरअसल, कैल्शियम कार्बाइड और पानी को प्लास्टिक या लोहे के पाइप में भरकर इससे तेज धमाका किया जाता है। पिछले साल दिवाली पर बिहार और मध्य प्रदेश में इस जुगाड़ से करीब 400 बच्चे अस्पताल पहुंचे थे, जिनमें से कई की आंखों की रोशनी चली गई।

इस बार दिवाली से पहले ही मध्य प्रदेश सरकार सतर्क हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी कलेक्टरों और एसपी को कार्बाइड गन और लैंप पर सख्त प्रतिबंध लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पटाखा दुकानों के लाइसेंस, विस्फोटक सामग्री के अवैध भंडारण और कैल्शियम कार्बाइड की बिक्री पर कड़ी नजर रखने को कहा है। वहीं, संवेदनशील जगहों पर फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और मेडिकल स्टाफ की तैनाती के भी आदेश दिए गए हैं।

बच्चों की आंखों पर कार्बाइड गन का खतरा

खतरे की गंभीरता का अंदाजा पटना की एक नई स्टडी से भी लगाया जा सकता है। इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थाल्मोलॉजी में अक्टूबर 2026 में प्रकाशित इस स्टडी में 10 दिन के त्योहारी सीजन के दौरान आए 37 मरीजों का विश्लेषण किया गया। डॉ. राखी कुसुमेश और उनकी टीम ने पाया कि सभी 37 मरीज लड़के थे, जिनकी औसत उम्र सिर्फ 15 साल थी। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि 64.8 फीसदी मामलों में आंखों को ग्रेड IV से VI तक की गंभीर चोटें आई थीं।

स्टडी के मुताबिक, 83.8 फीसदी बच्चे घर पर बने PVC पाइप के कार्बाइड गन में धमाका न होने पर पाइप के अंदर झांकने की वजह से घायल हुए। कैल्शियम कार्बाइड पानी के संपर्क में आकर एसिटिलीन गैस छोड़ता है, जो एक छोटी सी चिंगारी से ही फट सकता है। वहीं, फटने पर प्लास्टिक और धातु के टुकड़े चेहरे और आंखों पर लगते हैं। अच्छी खबर यह है कि समय पर एम्नियोटिक मेम्ब्रेन ट्रांसप्लांटेशन जैसी सर्जरी से एक हफ्ते में ही रोशनी में काफी सुधार दर्ज किया गया।

हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि रोकथाम ही सबसे बड़ा इलाज है। माता-पिता को बच्चों को ऐसे देसी जुगाड़ से दूर रखना चाहिए और बाजार में इनकी बिक्री दिखे तो प्रशासन को सूचित करना चाहिए। वहीं, अगर आंख में चोट लगे तो तुरंत अस्पताल पहुंचें, आंख मलें नहीं और घरेलू नुस्खों पर भरोसा न करें। दिवाली पर सेहत से जुड़ी ऐसी ही जानकारी के लिए लिवर रीसेट पर हमारा लेख पढ़ें। इस कार्रवाई पर New Indian Express की रिपोर्ट में विस्तार से पढ़ा जा सकता है।

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