दिवाली की स्मॉग में कपड़े वाला मास्क बेकार! डॉक्टरों ने बताया कौन-सा मास्क बचाएगा, एयर प्यूरीफायर और इंडोर प्लांट्स का असली सच

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दिवाली की स्मॉग में कपड़े वाला मास्क बेकार! डॉक्टरों ने बताया कौन-सा मास्क बचाएगा, एयर प्यूरीफायर और इंडोर प्लांट्स का असली सच
फोटो: न्यूज़18 / चाइना डेली (प्रतिनिधि चित्र)

दिवाली आते ही उत्तर भारत की हवा जहरीली हो जाती है। पटाखों के धुएं, पराली के जलने और सर्दी की ठिठुरन वाली स्थिर हवा मिलकर दिल्ली जैसे शहरों में AQI को खतरनाक स्तर तक पहुंचा देती हैं। ऐसे में दिवाली स्मॉग से बचाव की सबसे पहली शर्त है सही जानकारी, क्योंकि गलत मास्क पहनकर खुद को सुरक्षित समझना भ्रम साबित हो सकता है। हाल ही में डॉक्टरों ने मास्क, एयर प्यूरीफायर और इंडोर प्लांट्स को लेकर कई अहम सच्चाइयां बताई हैं।

दिवाली स्मॉग से बचाव के लिए कौन-सा मास्क सही है?

डॉक्टरों के मुताबिक आम कपड़े या सर्जिकल मास्क PM2.5 जैसे बेहद महीन कणों को रोकने में लगभग बेकार हैं, क्योंकि इनमें न तो विशेष फिल्टर होता है और न ही चेहरे पर सही सील बनती है। इसके बाद विशेषज्ञ टाइट-फिटिंग N95 या FFP2 रेस्पिरेटर की सलाह देते हैं, जो सही तरीके से पहनने पर करीब 95% कणों को छान लेता है। हालांकि फिटिंग ही असली खेल है — नाक के पास गैप, खुला मुंह या दाढ़ी सील को बिगाड़कर सुरक्षा कम कर देती है। दरअसल एक अच्छी N95 भी पूरी सुरक्षा नहीं देती, इसलिए डॉक्टर बाहर निकलना कम करने की भी सलाह देते हैं।

वहीं घर के अंदर की हवा को लेकर डॉक्टर एयर प्यूरीफायर को उपयोगी मानते हैं, बशर्ते वह HEPA फिल्टर वाला हो और कमरे के आकार के हिसाब से सही CADR वाला चुना गया हो। खिड़कियां-दरवाजे बंद रखकर चलाया गया प्यूरीफायर बंद कमरे की PM2.5 मात्रा को काफी कम कर देता है। हालांकि ध्यान रहे कि प्यूरीफायर सभी गैसीय प्रदूषकों को नहीं हटाता और घर को पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त भी नहीं बना सकता। वहीं डॉक्टर दरवाजे-खिड़कियां बंद रखने के साथ बाहर वेंटिलेशन वाले एग्जॉस्ट फैन और गीले कपड़े से सतहें पोंछने की भी सलाह देते हैं।

इंडोर प्लांट्स को लेकर डॉक्टरों ने तोड़ा बड़ा भ्रम

इंडोर प्लांट्स को लेकर डॉक्टरों ने एक बड़ा भ्रम भी तोड़ा है। उनका कहना है कि घर के पौधे होना अच्छा है, लेकिन वे कमरे की हवा साफ करने का समाधान नहीं हैं, क्योंकि प्रयोगशाला में दिखने वाला असर आम घर में न के बराबर होता है। वहीं ज्यादा पानी देने से गमलों में फफूंद पनप सकती है, जो एलर्जी या अस्थमा वाले लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है। इसके बाद डॉक्टर रोजाना AQI चेक करने और धूपबत्ती, मच्छरों के कॉइल तथा तेज धूप वाले खाना पकाने के धुएं से बचने की भी सलाह देते हैं।

इसके अलावा अस्थमा, COPD या दिल की बीमारी वाले मरीजों को अपनी नियमित दवाएं जारी रखने और इन्हेलर हमेशा साथ रखने की हिदायत दी गई है। लगातार खांसी, सांस फूलना या सीने में दर्द को स्मॉग का सामान्य असर समझकर नजरअंदाज न करें, बल्कि तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। हालांकि सबसे जरूरी बात यह है कि प्रदूषण ज्यादा होने पर बच्चों और बुजुर्गों को घर के अंदर ही रखें। दिल्ली की हवा पर हमारी यह रिपोर्ट भी पढ़ें। (स्रोत: WION)

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