भारतीय क्रिकेट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। सोमवार 19 अक्टूबर को BCCI ने घोषणा की कि पूर्व भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा चीफ सिलेक्टर के तौर पर टीम इंडिया की चयन समिति की कमान संभालेंगे। वह अजित आगरकर की जगह लेंगे, जिन्होंने कार्यकाल बढ़ाने में रुचि नहीं दिखाई थी। इसके साथ ही पूर्व क्रिकेटर रमेश पोवार को भी चयन पैनल में नया सदस्य बनाया गया है।
प्रज्ञान ओझा चीफ सिलेक्टर कैसे बने?
BCCI ने प्रेस रिलीज में बताया कि क्रिकेट सलाहकार समिति (CAC) ने बीसीसीआई मुख्यालय में बैठक कर कई उम्मीदवारों के इंटरव्यू लिए। इस पैनल में अशोक मल्होत्रा और जतिन परांजपे शामिल थे, जिन्होंने सर्वसम्मति से ओझा के नाम की सिफारिश की। बोर्ड के नियमों के अनुसार सबसे ज्यादा टेस्ट खेलने वाले सदस्य को अध्यक्ष बनाया जाता है, और पांच सदस्यीय पैनल में ओझा (24 टेस्ट) सबसे वरिष्ठ हैं। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि ओझा इस साल सितंबर से ही अंतरिम चयनकर्ता की भूमिका निभा रहे थे।
बाएं हाथ के स्पिनर ओझा ने 2008 से 2013 के बीच भारत के लिए 24 टेस्ट, 18 वनडे और 6 टी20 खेले हैं। सचिन तेंदुलकर के विदाई टेस्ट में वेस्टइंडीज के खिलाफ 10 विकेट लेकर उन्होंने इतिहास रच दिया था। उनके नाम टेस्ट में कुल 113 विकेट दर्ज हैं। हालांकि 2014 में उनके गेंदबाजी एक्शन पर सवाल उठे थे, लेकिन 2015 में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी।
रमेश पोवार की एंट्री, जानिए नई पैनल की पूरी टीम
अजित आगरकर के जाने से खाली हुई जगह पर पूर्व ऑफ स्पिनर रमेश पोवार को चुना गया है। पोवार ने भारत के लिए 2 टेस्ट और 31 वनडे खेले हैं, और इसके बाद उन्होंने कोचिंग में बड़ा नाम कमाया है। वह भारतीय महिला टीम के हेड कोच रह चुके हैं, इसके अलावा उन्होंने मुंबई और गुजरात की टीमों को भी कोच किया है।
अब चयन समिति में प्रज्ञान ओझा (अध्यक्ष), शिव सुंदर दास, आरपी सिंह, अजय रात्रा और रमेश पोवार शामिल हैं। यह नई पैनल आगामी द्विपक्षीय सीरीज और आईसीसी टूर्नामेंटों के लिए भारतीय टीम के चयन की जिम्मेदारी संभालेगी। दरअसल, भारतीय क्रिकेट एक नए चक्र में प्रवेश कर रहा है, ऐसे में चयनकर्ताओं की भूमिका और भी अहम हो गई है। रायपुर में जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में टीम इंडिया के धमाकेदार प्रदर्शन के बाद सबकी नजर अब नई चयन समिति पर टिकी है।
बोर्ड ने अपने बयान में निवर्तमान अध्यक्ष अजित आगरकर की सराहना भी की है। आगरकर जुलाई 2023 से इस पद पर थे और उनके कार्यकाल में भारत ने तीन आईसीसी खिताब जीते थे। वहीं, अब ओझा के नेतृत्व वाली समिति से प्रशंसकों को काफी उम्मीदें हैं। (स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस)






