बचपन में सर्दी-खांसी या बुखार होते ही ज्यादातर बच्चे एंटीबायोटिक दवाएं खा लेते हैं। कई बार बिना डॉक्टर की सलाह के ही ये दवाएं दे दी जाती हैं। लेकिन अब एक नई रिसर्च ने चेताया है कि बचपन में बार-बार एंटीबायोटिक लेने से पेट की गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। दरअसल, एंटीबायोटिक IBS यानी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम का खतरा 24 साल की उम्र तक 1.5 गुना तक बढ़ सकता है।
यह खुलासा स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित UEG Week 2026 में पेश एक स्वीडिश रिसर्च में हुआ है। वैज्ञानिकों ने स्वीडन के BAMSE बर्थ कोहर्ट के 2,853 लोगों का 9 से 11 साल की उम्र से 24 साल तक का डेटा खंगाला। दवाओं के पर्चे स्वीडिश प्रिस्क्राइब्ड ड्रग रजिस्टर से लिए गए, ताकि गलत रिपोर्टिंग की गुंजाइश न रहे।
एंटीबायोटिक IBS का खतरा: जितनी ज्यादा दवा, उतना ज्यादा जोखिम
नतीजे चौंकाने वाले थे। 24 साल की उम्र में 10 फीसदी लोगों को IBS मिला, और इनमें से 87.8 फीसदी ने कभी न कभी एंटीबायोटिक लिया था, जबकि IBS न होने वालों में यह आंकड़ा 80.2 फीसदी था। सेक्स और परिवार की आर्थिक स्थिति का असर हटाने के बाद भी एंटीबायोटिक लेने वालों में IBS के ओड्स 1.5 गुना ज्यादा पाए गए। वहीं एक-दो पर्चे वालों में जोखिम 1.3 गुना, तीन से पांच पर्चों में 1.6 गुना और छह से ज्यादा पर्चों वालों में 1.7 गुना तक बढ़ गया।
रिसर्च में दवाओं के अलग-अलग वर्गों पर भी गौर किया गया। टेट्रासाइक्लिन ग्रुप की दवाओं से IBS का जोखिम 1.4 गुना ज्यादा मिला, जबकि सेफालोस्पोरिन ग्रुप की तीन से ज्यादा पर्चे वालों में यह 6 गुना तक बढ़ गया। यानी कुछ एंटीबायोटिक वर्गों का असर पेट की सेहत पर ज्यादा गंभीर हो सकता है।
डॉक्टर क्या कहते हैं: घबराएं नहीं, समझदारी से इस्तेमाल करें
हालांकि शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि यह अध्ययन संबंध दिखाता है, साबित वजह नहीं — यानी हर एंटीबायोटिक लेने वाले बच्चे को IBS होगा, ऐसा बिल्कुल नहीं है। डॉक्टरों की सलाह है कि जरूरी होने पर डॉक्टर के बताए अनुसार दवा जरूर लें, लेकिन बिना जरूरत या बिना पर्चे के एंटीबायोटिक न खाएं। पेट से जुड़ी सेहत पर इससे पहले आई एक बड़ी स्टडी यहां पढ़ें: चेन्नई की स्टडी में खुलासा: रिफाइंड कार्ब और खास जीन बढ़ाते हैं कोलेस्ट्रॉल का खतरा।
रिसर्चरों का मानना है कि एंटीबायोटिक आंत के अच्छे बैक्टीरिया को भी मार देते हैं, जिससे पाचन तंत्र का संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे में बच्चों को फाइबर से भरपूर डाइट देने की सलाह दी गई है। UEG Week 2026 में पेश मूल रिसर्च रिपोर्ट यहां पढ़ें।






