नींद-खाना-एक्सरसाइज से ज्यादा जरूरी ये 2 आदतें! 5 साल की स्टडी में टीनएजर्स पर बड़ा खुलासा

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नींद-खाना-एक्सरसाइज से ज्यादा जरूरी ये 2 आदतें! 5 साल की स्टडी में टीनएजर्स पर बड़ा खुलासा
तस्वीरें: Istituto Toniolo / The Mindfulness App (प्रतीकात्मक)

हर पेरेंट्स की एक ही चिंता होती है — बच्चा ठीक से सोता है या नहीं, खाना टाइम पर खाता है या नहीं, और खेलकूद करता है या नहीं। टीनएज मानसिक सेहत को लेकर दशकों से यही ‘बड़ी तीन’ आदतें सबसे ज्यादा दोहराई जाती रही हैं। हालांकि ऑस्ट्रेलिया की एक नई रिसर्च इस पूरी सूची को अधूरी बताती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि दो ऐसी आदतें भी हैं, जिनका असर नींद, खाने और एक्सरसाइज से भी ज्यादा गहरा निकला है।

5 साल चली स्टडी: क्या-क्या ट्रैक किया गया

यूनिवर्सिटी ऑफ द सनशाइन कोस्ट के थॉम्पसन इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने 12 से 17 साल के टीनएजर्स को पांच साल तक फॉलो किया। इस दौरान उन्होंने पांच रोजमर्रा के फैक्टर्स — नींद, खानपान, शारीरिक गतिविधि, सामाजिक जुड़ाव और माइंडफुलनेस — का डेटा नियमित रूप से जमा किया। स्टडी की अगुवाई यूथ मेंटल हेल्थ रिसर्चर डॉ. तालिया प्रिंस ने की और इसके नतीजे 8 अक्टूबर 2026 को ‘जर्नल ऑफ एडोलसेंस’ में प्रकाशित हुए। जिन टीनएजर्स में ये सुरक्षात्मक फैक्टर्स ज्यादा थे, उन्होंने आगे चलकर कम मानसिक तनाव और बेहतर वेलबीइंग की रिपोर्ट दी।

टीनएज मानसिक सेहत पर सबसे बड़ा असर: सामाजिक जुड़ाव

पांचों फैक्टर्स में सबसे मजबूत असर सामाजिक जुड़ाव का निकला। दरअसल, जो बच्चे दूसरों से भावनात्मक रूप से जुड़े महसूस करते थे, उनमें कम तनाव और ज्यादा संतुष्टि पाई गई। इसके बाद दूसरी सबसे अहम आदत माइंडफुलनेस रही — यानी रोजमर्रा की जिंदगी में पूरी तरह मौजूद और व्यस्त महसूस करना। खास बात यह कि शोधकर्ताओं ने जब बच्चों की पहले की मानसिक स्थिति को भी गणना में समायोजित कर दिया, तब भी यह असर बना रहा। इसका मतलब है कि ये दो आदतें बच्चे के शुरुआती स्तर से ऊपर अतिरिक्त लाभ देती हैं।

भारतीय पेरेंट्स के लिए 3 काम की बातें

हालांकि इसका मतलब यह कतई नहीं कि नींद, खाना और एक्सरसाइज बेमानी हैं — शोधकर्ता खुद कहते हैं कि ये अहम हैं, लेकिन तस्वीर इनसे बड़ी है। पेरेंट्स अपने बच्चों को दोस्तों और परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। वहीं स्क्रीन से दूर कुछ पल ‘पूरी तरह मौजूद रहने’ की आदत — जैसे खाना बिना फोन के खाना या रोज कुछ मिनट चुपचाप बैठना — माइंडफुलनेस को धीरे-धीरे बढ़ाती है। इसके बाद भी ध्यान रखें: यह एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी है, जो संबंध (एसोसिएशन) बताती है, सीधा कारण नहीं — और गंभीर मानसिक परेशानी की स्थिति में डॉक्टर या काउंसलर से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

मानसिक सेहत से जुड़ी एक और अहम खबर हमने हाल में प्रकाशित की थी — तनाव घटाने में सुबह की 4 आदतों पर नई स्टडी के नतीजे। इस ऑस्ट्रेलियाई रिसर्च की मूल रिसर्च रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने साफ कहा है कि नींद, डाइट और एक्सरसाइज अहम हैं, लेकिन अब पेरेंट्स को इससे बड़ी तस्वीर देखनी होगी।

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