रोज़ाना कॉफी पीते हैं? नई स्टडी में बड़ा खुलासा — कैफीन नहीं, ये है असली हीरो

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रोज़ाना कॉफी पीते हैं? नई स्टडी में बड़ा खुलासा — कैफीन नहीं, ये है असली हीरो
तस्वीरें: Pexels (फ्री स्टॉक); कोलाज: TheFocusWorld

सुबह की नींद उड़ानी हो या काम के बीच की थकान मिटानी हो, ज़्यादातर लोग कॉफी को सिर्फ कैफीन की एक डोज़ समझते हैं। लेकिन आयरलैंड के वैज्ञानिकों की नई रिसर्च कहती है कि कॉफी और सेहत का रिश्ता इससे कहीं गहरा है। यूनिवर्सिटी कॉलेज कॉर्क के APC Microbiome Ireland के शोधकर्ताओं ने Nature Communications में प्रकाशित अपनी स्टडी में पाया कि कॉफी हमारे पेट के बैक्टीरिया की बनावट बदलती है, और उसी रास्ते से मूड, तनाव, याददाश्त और ध्यान पर भी असर डालती है।

स्टडी में क्या-क्या किया गया

शोधकर्ताओं ने 31 ऐसे लोगों को चुना जो रोज़ाना 3 से 5 कप कॉफी पीते थे, और 31 ऐसे लोगों को भी शामिल किया जो कॉफी नहीं पीते थे। यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण के मुताबिक 3 से 5 कप की मात्रा ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित मानी जाती है। पहले कॉफी पीने वालों ने दो हफ्तों तक कॉफी पूरी तरह छोड़ दी, और इस दौरान उनके पेट के केमिकल प्रोफाइल में साफ बदलाव देखे गए। इसके बाद बिना बताए आधे प्रतिभागियों को कैफीन वाली और आधे को डिकैफ कॉफी दी गई, और तीन हफ्तों तक उनकी नींद, मूड और याददाश्त का परीक्षण हुआ।

कॉफी और सेहत: डिकैफ में छिपा खास फायदा

सबसे चौंकाने वाला नतीजा यह रहा कि कैफीन वाली और डिकैफ — दोनों तरह की कॉफी पीने वालों ने तनाव, उदासी और आवेग के स्कोर में कमी महसूस की। यानी मूड पर असर डालने में कैफीन अकेला खिलाड़ी नहीं है। दरअसल, डिकैफ कॉफी पीने वालों की सीखने की क्षमता और याददाश्त में सुधार दिखा, वहीं कैफीन वाली कॉफी से चिंता कम हुई और ध्यान बेहतर हुआ। शोधकर्ताओं का मानना है कि कॉफी में मौजूद पॉलीफेनॉल जैसे यौगिक इन फायदों की असली वजह हो सकते हैं, जो पेट के बैक्टीरिया के साथ मिलकर असर दिखाते हैं।

स्टडी में कॉफी पीने वालों के पेट में Eggertella और Cryptobacterium curtum जैसे कुछ खास बैक्टीरिया ज़्यादा मात्रा में पाए गए, जिन्हें पाचन के लिए फायदेमंद माना जाता है। हालांकि इसके अलावा Firmicutes नाम के बैक्टीरिया समूह का स्तर भी बढ़ा, जिसे पहले सकारात्मक भावनाओं से जोड़ा जा चुका है। प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर जॉन क्रायन का कहना है कि कॉफी सिर्फ कैफीन पहुंचाने का ज़रिया नहीं है, बल्कि पेट के माइक्रोब्स, मेटाबॉलिज़्म और मानसिक सेहत से जुड़ने वाला एक जटिल आहार कारक है। वहीं गरम पेय पदार्थों के सेवन के खतरे पर हमारी यह रिपोर्ट भी पढ़ें।

हालांकि स्टडी का आकार छोटा था, इसलिए यह साबित नहीं करती कि कॉफी सीधे तौर पर ये फायदे देती है — लेकिन यह साफ करती है कि इसका असर कैफीन से कहीं आगे तक जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक कॉफी को संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर ही इसके संभावित फायदों को समझा जा सकता है। इस रिसर्च की पूरी जानकारी यहां पढ़ी जा सकती है।

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