71 साल जीएंगे भारतीय, लेकिन सेहतमंद जिंदगी सिर्फ 60 तक! जानिए कौन सी बीमारियां छीन रहीं जिंदगी के आखिरी 10 साल

·

71 साल जीएंगे भारतीय, लेकिन सेहतमंद जिंदगी सिर्फ 60 तक! जानिए कौन सी बीमारियां छीन रहीं जिंदगी के आखिरी 10 साल
बाईं तस्वीर: Brandpoint/FinancialContent (हेल्दी एजिंग), दाईं तस्वीर: Vitória Spa ब्लॉग — सांकेतिक चित्र।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताज़ा ग्लोबल हेल्थ एस्टिमेट्स रिपोर्ट में भारत के लिए दोहरी खबर सामने आई है। 2023 में भारत की जीवन प्रत्याशा 71 साल हो गई है — महामारी के बाद रिकवरी का साफ संकेत। हालांकि इस अच्छी खबर के पीछे एक चिंताजनक सच्चाई भी छिपी है। दरअसल उम्र तो बढ़ गई, लेकिन सेहतमंद जिंदगी के साल उसके साथ नहीं बढ़ पाए।

WHO की यह रिपोर्ट 2 अक्टूबर को जारी हुई, जिसमें 2000 से 2023 तक मौत के कारणों और बीमारियों के बोझ का विश्लेषण शामिल है। 2023 में पाकिस्तान में 68.2 और बांग्लादेश में 72.7 साल जीवन प्रत्याशा रही, जबकि अमेरिका (78.5) और कनाडा (81.4) सबसे आगे हैं। वैश्विक औसत 73.3 साल रहा, जो 2019 के 73.4 साल के करीब है। वहीं भारत की जीवन प्रत्याशा 2021 में गिरकर 68.1 साल हो गई थी, जिससे उबरकर वह 2023 में 71 साल पर पहुंची।

जीवन प्रत्याशा बढ़ी, लेकिन स्वस्थ जीवन के साल क्यों पीछे छूटे

रिपोर्ट की सबसे बड़ी चिंता ‘हेल्दी लाइफ एक्सपेक्टेंसी’ यानी स्वस्थ जीवन के सालों को लेकर है। 2023 में भारत में स्वस्थ जीवन की उम्मीद सिर्फ 60.6 साल रही, जो 2019 के 60.5 से महज 0.1 साल ज्यादा है। इसका सीधा मतलब है कि भारतीय औसतन करीब 10 साल ऐसे गुजारते हैं, जिनमें बीमारी या शारीरिक कमजोरी साथ रहती है। 2021 में यह आंकड़ा 58.4 साल तक गिर गया था, और इसके बाद की रिकवरी काफी धीमी रही है।

इस अंतर की सबसे बड़ी वजह गैर-संचारी रोग यानी एनसीडी हैं। भारत में मौत के प्रमुख कारणों में हृदय रोग, सीओपीडी, स्ट्रोक, डायबिटीज और टीबी शामिल हैं। वैश्विक स्तर पर 2023 में 74 फीसदी मौतें इन्हीं बीमारियों से हुईं, जबकि 2000 में यह आंकड़ा 58 फीसदी था। हालांकि इलाज की सुविधाएं बेहतर हुई हैं, वहीं लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों का बोझ बढ़ता जा रहा है।

WHO के एलन लाब्रिक के अनुसार लंबी उम्र जनस्वास्थ्य की बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अगली चुनौती ये अतिरिक्त साल अच्छी सेहत में बिताना है। इसका मतलब साफ है कि 40 की उम्र के बाद संतुलित आहार और रोज की शारीरिक गतिविधि अब जरूरत बन गई है। इसके साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच, धूम्रपान और शराब से दूरी तथा वजन पर नियंत्रण जैसी आदतें भी समय रहते अपनानी होंगी।

रिपोर्ट दिखाती है कि भारत बीमारियों के दोहरे बोझ से जूझ रहा है — संक्रामक रोगों के साथ पुरानी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक रोकथाम पर खर्च किया गया हर रुपया बाद में इलाज पर होने वाले भारी खर्च से बेहतर है। अगर यह अंतर कम करना है, तो स्वस्थ जीवनशैली को अब विकल्प नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा बनाना होगा, जैसा कि WHO की ग्लोबल हेल्थ एस्टिमेट्स रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं।

thefocusworld