फूड इज मेडिसिन पर हुई एक नई लंबी स्टडी ने चौंकाने वाले नतीजे दिए हैं, जो सेहत की दुनिया में बड़ी चर्चा का विषय बने हुए हैं। अमेरिका में Mass General Brigham के शोधकर्ताओं ने पाया कि मुफ्त में मिलने वाले पौधे-आधारित ग्रॉसरी पैकेज से लोगों का ब्लड प्रेशर और वजन दोनों घटा। यह स्टडी औसतन 2.7 साल तक चली, जो इस तरह की रिसर्च में बेहद लंबा समय माना जाता है। दरअसल, शोधकर्ताओं का कहना है कि अच्छा खाना लंबे समय तक मिले तो वह दवा जैसा असर दिखा सकता है।
इस स्टडी में 68 वयस्कों को शामिल किया गया, जिन्हें हर हफ्ते मुफ्त ग्रॉसरी पैकेज दिया गया। हर पैकेज को एक डायटीशियन ने अमेरिकी डाइटरी गाइडलाइंस के आधार पर तैयार किया था। इनमें ताज़े फल-सब्जियां, डिब्बाबंद फलियां, नट बटर और साबुत अनाज शामिल थे। हर पैकेज में इतना खाना था कि परिवार के हर सदस्य के लिए हफ्ते भर तीनों वक्त का भोजन बन सके। प्रतिभागियों को औसतन 97 पैकेज मिले, यानी वे करीब तीन साल तक इस प्रोग्राम से जुड़े रहे।
नतीजे बताते हैं कि जितने ज्यादा पैकेज मिले, सेहत में उतना ही ज्यादा सुधार दिखा। औसतन हर 100 पैकेज पर डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 3.21 mmHg घटा और वजन 2.6 किलो कम हुआ। वहीं BMI में भी 1.04 kg/m² की कमी दर्ज की गई। जिन लोगों का ब्लड प्रेशर शुरुआत में ज्यादा था, उनमें सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर भी कम हुआ। हालांकि, डायबिटीज़ से जुड़े HbA1c स्तर में कोई खास सुधार नहीं दिखा, जो इस प्रोग्राम की एक सीमा बताता है।
फूड इज मेडिसिन स्टडी में क्या मिला
इस स्टडी की सबसे खास बात इसका लंबा समय है, क्योंकि आमतौर पर ऐसी रिसर्च कुछ हफ्तों या महीनों में ही खत्म हो जाती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक लंबे समय तक अच्छा और पौष्टिक खाना मिलने से दिल और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी सेहत पर टिकाऊ असर पड़ता है। हालांकि, यह भी साफ है कि डायबिटीज़ जैसे मामलों के लिए सिर्फ खाने से काम नहीं चलेगा, वहां खास इलाज भी जरूरी है। फिर भी ब्लड प्रेशर और वजन के मामले में यह नतीजा उम्मीद से बेहतर रहा।
स्टडी के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. जैकब मिर्स्की का कहना है कि बार-बार अच्छी क्वालिटी का भरपूर खाना लंबे समय तक देने वाले प्रोग्राम ही सबसे ज्यादा फायदा पहुंचाते हैं। यह रिसर्च Preventing Chronic Disease जर्नल में प्रकाशित हुई है। वहीं भारत में भी मुफ्त राशन योजनाएं चलती हैं, हालांकि उनमें पोषण की क्वालिटी पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता। दरअसल, यह स्टडी यही सिखाती है कि राशन सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि सेहत सुधारने का हथियार भी बन सकता है। डाइट ट्रेंड्स की बात करें तो रोज़ 50 ग्राम फाइबर वाले वायरल डाइट ट्रेंड पर भी हाल ही में सवाल उठे थे।






