प्रदूषण में भी वॉक करना फायदेमंद! फेफड़ों की इस बीमारी पर स्टडी में बड़ा खुलासा, जानें क्या कहा डॉक्टरों ने

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प्रदूषण में भी वॉक करना फायदेमंद! फेफड़ों की इस बीमारी पर स्टडी में बड़ा खुलासा, जानें क्या कहा डॉक्टरों ने
तस्वीर: ETV Bharat/Getty Images, Pexels | कोलाज: TheFocusWorld

अगर आप प्रदूषण की वजह से सुबह की सैर छोड़ने की सोच रहे हैं, तो एक ताजा COPD वॉक स्टडी आपके लिए राहत भरी खबर लेकर आई है। स्पेन के वैज्ञानिकों की नई रिसर्च का दावा है कि प्रदूषित इलाके में रहने के बावजूद रोजाना वॉक फेफड़ों की गंभीर बीमारी के मरीजों के लिए फायदेमंद है। COPD यानी क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज में सांस लेने में दिक्कत, खांसी और घरघराहट होती है। अब तक डॉक्टर प्रदूषण वाले इलाकों के मरीजों को वॉक की सलाह देने से हिचकते थे।

यह रिसर्च यूरोपियन रेस्पिरेटरी सोसाइटी के जर्नल ERJ Open Research में प्रकाशित हुई है। इसे बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ (ISGlobal) की डॉ. अलिसिया जोसा-कुलेरे और प्रो. जूडिथ गार्सिया-एमरिच ने किया है। इसमें ब्रिटेन, स्पेन, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और ग्रीस के 262 COPD मरीजों ने 7 दिनों तक मूवमेंट सेंसर पहना, ताकि उनके कदमों, वॉक की अवधि और रफ्तार को मापा जा सके। शोधकर्ताओं ने मरीजों के घरों पर पिछले 2 सालों के वायु प्रदूषण (PM2.5, ब्लैक कार्बन, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, ओजोन) का डेटा भी जुटाया।

COPD वॉक स्टडी के नतीजे चौंकाने वाले

शोधकर्ताओं ने पाया कि नियमित वॉक करने वाले मरीजों में बीमारी के लक्षणों के अचानक बढ़ने (फ्लेयर-अप्स) की घटनाएं कम हुईं, और यह फायदा घर के आसपास के प्रदूषण स्तर से प्रभावित नहीं हुआ। आंकड़ों के मुताबिक, रोजाना सिर्फ 1000 कदम चलने से फ्लेयर-अप की आशंका करीब 5% तक कम हो गई। वहीं, जो मरीज औसत रफ्तार (एक मीटर प्रति सेकंड) से तेज चलते थे, उन्हें फायदा और भी ज्यादा मिला। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि बीमारी की गंभीरता चाहे जो भी हो, वॉक का फायदा सभी मरीजों को मिला।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने एक जरूरी सावधानी भी बताई है। उनका कहना है कि स्टडी वाले इलाकों में प्रदूषण WHO की तय सीमा से ज्यादा था, लेकिन बेहद ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों पर ये नतीजे लागू नहीं भी हो सकते हैं। यूरोपियन रेस्पिरेटरी सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. मार्क मिरावित्लेस, जो इस रिसर्च में शामिल नहीं थे, ने कहा कि यह स्टडी COPD मरीजों को भरोसा देती है कि शहर के बीचों-बीच रहकर भी वॉक फायदेमंद है, लेकिन दुनिया के कुछ हिस्सों में प्रदूषण कहीं ज्यादा होता है, जहां और रिसर्च की जरूरत है।

शोधकर्ताओं का साफ संदेश है कि इसका मतलब यह नहीं है कि वायु प्रदूषण की चिंता छोड़ दी जाए। प्रदूषण से दूरी अब भी जरूरी है, और जब संभव हो, कम प्रदूषण वाली जगहों पर वॉक करना बेहतर है। लेकिन निष्क्रिय बैठे रहने से रोजाना वॉक करना कहीं बेहतर है, चाहे आप प्रदूषित इलाके में ही क्यों न रहते हों। दिल्ली जैसे शहरों में यह सलाह और भी अहम है — दिल्ली की हवा से जुड़ी स्टडी यहां पढ़ें। (सूत्र: MedicalXpress)

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