दिल्ली की हवा युवाओं के दिल को पहुंचा रही नुकसान! स्टडी में बड़ा खुलासा, जानिए बचाव का तरीका

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दिल्ली की हवा युवाओं के दिल को पहुंचा रही नुकसान! स्टडी में बड़ा खुलासा, जानिए बचाव का तरीका
दिल्ली में स्मॉग और मास्क पहने युवा | फोटो: TV9 Hindi/ANI और The Telegraph (फोटो गैलरी) से साभार

राजधानी दिल्ली की हवा युवाओं के दिल के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। दिल्ली वायु प्रदूषण पर दिल्ली यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की ताजा स्टडी ने यह चेतावनी जारी की है। स्टडी के मुताबिक सर्दियों में दिल्ली में PM2.5 का औसत स्तर 269.35 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय मानक का करीब सात गुना है। यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन से भी लगभग 18 गुना ज्यादा बताया गया है।

यह रिसर्च यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली के हिंदू कॉलेज और जाकिर हुसैन कॉलेज के शोधकर्ताओं ने मिलकर की है। स्टडी मार्च 2026 में फ्रंटियर्स इन सस्टेनेबल सिटीज जर्नल में प्रकाशित हुई। 17 अक्टूबर 2023 से 12 जनवरी 2024 तक चले इस अध्ययन में पाया गया कि करीब 98 प्रतिशत रीडिंग्स राष्ट्रीय मानक से ऊपर थीं। दिसंबर के आखिरी दिनों में PM2.5 का स्तर 700 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर को भी पार कर गया था। वहीं सर्दियों का औसत गर्मियों और मानसून के मुकाबले पांच गुना से ज्यादा दर्ज किया गया।

डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेना, नींद की कमी, तनाव और शारीरिक गतिविधि न होना मिलकर दिल के खतरों को बढ़ा देता है। फोर्टिस गुरुग्राम के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. उदगीथ धीर के अनुसार बारीक कण नसों में सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता में गड़बड़ी को बढ़ावा देते हैं। खराब नींद ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक संतुलन बिगाड़कर दिल की संवेदनशीलता बढ़ा देती है। हालांकि युवाओं में हृदय रोग का कारण हमेशा एक कारक नहीं होता, लेकिन यह मिश्रण मौजूदा जोखिमों को कई गुना कर देता है।

दिल्ली वायु प्रदूषण से दिल को बचाने के उपाय

स्टडी के मॉडल का अनुमान है कि मौजूदा वार्षिक प्रदूषण स्तर पर कार्डियोपल्मोनरी मृत्यु का जोखिम 1.65 गुना बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह आबादी-स्तर का मॉडल-आधारित अनुमान है, न कि यह कि इतने ही युवा बीमार पड़े। फिर भी यह आंकड़ा चेतावनी देने के लिए काफी है। दरअसल यह स्टडी युवाओं को समय रहते सावधान रहने और जीवनशैली सुधारने की सलाह देती है।

ऐसे में सुबह जल्दी या देर शाम भारी स्मॉग में बाहर व्यायाम करने से बचना चाहिए, और बाहर निकलते समय N95 मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। घर में एयर प्यूरीफायर लगाना और पर्याप्त नींद लेना दिल की सेहत के लिए उतना ही जरूरी है। महानगरों में बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों पर हमने मुंबई की हेल्थ रिपोर्ट में भी विस्तार से लिखा है। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार इन जोखिमों को कम करने में मदद करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों की नहीं, बल्कि पूरे शरीर की बीमारी बन चुका है। इस अध्ययन की पूरी जानकारी आप मिड-डे की इस रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं। आने वाली सर्दियों से पहले ही यह स्टडी दिल्लीवासियों के लिए एक अलार्म की तरह है।

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