22 की उम्र में ही बूढ़ा कर रही ये आदतें! स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

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22 की उम्र में ही बूढ़ा कर रही ये आदतें! स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा
प्रदूषित शहर बनाम हरा-भरा माहौल — स्टडी में दोनों के जैविक उम्र पर असर को मापा गया। (तस्वीर: earth.com और Pexels)

क्या आप जानते हैं कि बुढ़ापा 60 की उम्र में नहीं, बल्कि 22 की उम्र से ही तेज होने लग सकता है? फिनलैंड की एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि लाइफस्टाइल और आसपास का पर्यावरण बायोलॉजिकल एजिंग को युवावस्था में ही तेज कर सकता है। दरअसल, शोधकर्ताओं के मुताबिक बचपन और किशोरावस्था के अनुभव 22 साल की उम्र में आपकी जैविक उम्र के करीब 28 प्रतिशत अंतर को तय करते हैं।

वहीं यह स्टडी फिनलैंड की University of Jyväskylä के Faculty of Sport and Health Sciences ने की है, और इसे जर्नल Environment International में प्रकाशित किया गया है। हालांकि यह एक लॉन्गिट्यूडिनल ट्विन स्टडी है, जिसमें वैज्ञानिकों ने “एक्सपोज़ोम” — जीवनभर के लाइफस्टाइल और पर्यावरणीय अनुभवों का कुल योग — का जैविक उम्र पर असर जांचा। इसके बाद मशीन लर्निंग मॉडल्स से 186 अलग-अलग एक्सपोजर का विश्लेषण किया गया, जिसमें हरियाली, वायु प्रदूषण और इलाके की सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी शामिल थी।

दरअसल, नतीजे चौंकाने वाले थे। वहीं बचपन और किशोरावस्था में मापे गए एक्सपोजर ने 22 वर्ष की उम्र में एपिजेनेटिक एज के लगभग 28 प्रतिशत अंतर को समझाया। इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने कहा कि जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल और पर्यावरण मिलकर तय करते हैं कि शरीर कितनी तेजी से बूढ़ा होगा।

वहीं स्टडी में बताया गया कि बायोलॉजिकल एजिंग जन्म से पहले ही शुरू हो जाती है, और यह क्रोनोलॉजिकल एजिंग से तेज या धीमी हो सकती है। इसके बाद शोधकर्ताओं ने चेताया कि जिन लोगों की जैविक उम्र तेजी से बढ़ती है, उनमें उम्र से जुड़ी बीमारियां जल्दी होने का खतरा भी बढ़ जाता है। दरअसल, यही वजह है कि युवावस्था से ही स्वस्थ आदतें अपनाना जरूरी माना जा रहा है। (स्रोत: Gulf News)

बायोलॉजिकल एजिंग को धीमा कैसे करें?

हालांकि स्टडी से यह भी पता चला कि पर्यावरणीय स्थितियां और रहने की जगह दोनों अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं हरी-भरी जगहों के पास रहना और कम प्रदूषित माहौल बुढ़ापे की रफ्तार को धीमा कर सकता है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियाई रिसर्च का भी हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया कि डायबिटीज और हाइपरटेंशन की चिकित्सीय रोकथाम के साथ लाइफस्टाइल में बदलाव डिमेंशिया और अल्जाइमर के मामलों को काफी कम कर सकता है।

वहीं एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटी-छोटी आदतें बड़ा फर्क डालती हैं। हालांकि नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और तनाव कम करना जैविक उम्र बढ़ने की गति को धीमा कर सकता है। वहीं यह स्टडी याद दिलाती है कि सेहत सिर्फ जिम या डाइट नहीं — यह पूरे माहौल की कहानी है। स्क्रीन की लत से जुड़ी सेहत पर यहां पढ़ें — इंस्टाग्राम पर सिगरेट बन रही ‘कूल’, 80% पोस्ट तंबाकू को दिखा रही सकारात्मक।

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