अगर आप रोज़ाना UPI से पेमेंट करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। UPI चार्ज को लेकर चल रही बहस पर नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने सुप्रीम कोर्ट में साफ कहा है कि दुकानदार मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। NPCI ने 3 नवंबर 2026 को दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि UPI ऐप भी ग्राहकों से प्लेटफॉर्म फीस या कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं वसूल सकते। दरअसल यह मामला ₹2,000 से ऊपर के व्यापारी लेनदेन पर MDR लगाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
नए नियमों के मुताबिक, MDR सिर्फ उन पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर लगेगा जो ₹2,000 से ज्यादा के होंगे और यह चार्ज अधिकतम 0.4 फीसदी तक होगा। वहीं ₹75,000 या उससे ज्यादा के पेमेंट पर यह चार्ज ₹300 पर सीमित रहेगा। हालांकि NPCI ने बताया कि यह चार्ज सिर्फ करीब 4 फीसदी व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा, जबकि लगभग 96 फीसदी इससे अछूते रहेंगे। दरअसल ₹2,000 तक के सभी पेमेंट पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे गए पैसे पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा।
UPI चार्ज: छोटे दुकानदारों को राहत, जानें किसे नहीं देना होगा पैसा
छोटे दुकानदारों के लिए इस फैसले में बड़ी राहत है, क्योंकि जो व्यापारी महीने में ₹1 लाख तक UPI से पैसे पाते हैं, वे ज़ीरो-MDR व्यवस्था के दायरे में रहेंगे और उन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। इसके अलावा MDR कमाई का 5 फीसदी हिस्सा एक खास फंड में जाएगा, जिससे ₹20 लाख तक टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों के बीच UPI को बढ़ावा मिलेगा। वहीं NPCI ने साफ किया कि MDR कोई टैक्स या सरकारी फीस नहीं, बल्कि UPI से जुड़े पक्षों के बीच बंटने वाला व्यावसायिक चार्ज है। अगर कोई बैंक या UPI ऐप इस नियम का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी, जिसमें UPI सदस्यता खत्म करना भी शामिल है।
यह पूरा मामला अधिवक्ता अंजन दत्ता की जनहित याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट की धारा 10A में किए गए संशोधन को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2026 को केंद्र और NPCI से जवाब मांगा था, पर इस व्यवस्था पर अंतरिम रोक से इनकार कर दिया था। वहीं नई व्यवस्था दिवाली के बाद किसी अधिसूचित तारीख से लागू होगी, क्योंकि 15 अक्टूबर की मूल तारीख टाल दी गई थी। गौरतलब है कि डिजिटल सेवाएं अब रोज़मर्रा का हिस्सा हैं, जैसे हाल ही में WhatsApp पर PF बैलेंस जानने की सुविधा शुरू हुई है। कुल मिलाकर, UPI चार्ज पर NPCI के रुख से साफ है कि आम ग्राहकों की जेब पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।






