ऑकलैंड के ईडन पार्क में बुधवार 4 नवंबर को न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे के दौरान भारतीय कप्तान शुभमन गिल के माथे पर एक छोटी सी चमकती चीज ने सबका ध्यान खींच लिया। दरअसल, गिल के माथे के किनारे लगी यह डिवाइस शुभमन गिल Temple डिवाइस कहलाती है, जिसे जोमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल से जुड़ी टीम ने तैयार किया है। हालांकि यह देखने में बेहद छोटी है, लेकिन इसके पीछे की तकनीक और मैच के दौरान इसके इस्तेमाल को लेकर क्रिकेट जगत में बहस छिड़ गई है।
गिल इससे पहले 29 अक्टूबर को ऑकलैंड में टीम इंडिया के अभ्यास सत्र के दौरान भी इसी डिवाइस के साथ नजर आए थे।
शुभमन गिल Temple डिवाइस कैसे काम करती है
इस डिवाइस की तकनीक को ब्रेनफ्लो कहा जाता है, जिसमें ऑप्टिकल सेंसर की मदद से मस्तिष्क तक पहुंचने वाले रक्त प्रवाह में होने वाले बदलावों को मापा जाता है। हालांकि यह कोई ईईजी मशीन नहीं है, इसलिए यह दिमाग की इलेक्ट्रिक गतिविधि नहीं पढ़ती और न ही किसी के विचार जान सकती है। वहीं, इसके जरिए मिलने वाला एंट्रॉपी स्कोर शरीर पर पड़ने वाले शारीरिक और मानसिक दबाव का अंदाजा देने का दावा करता है, जिससे कोच और फिटनेस टीमें थकान और रिकवरी को बेहतर तरीके से समझने की उम्मीद करती हैं।
ICC के नियम क्या कहते हैं
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियमों के तहत खिलाड़ियों के क्षेत्र में मोबाइल फोन और इंटरनेट से जुड़े संचार उपकरणों पर पाबंदी है, हालांकि कुछ खास छूट भी दी जाती है। वहीं, साल 2018 में आईसीसी ने साफ किया था कि फोन, वाई-फाई या संदेश भेजने में सक्षम स्मार्टवॉच मैदान पर नहीं पहनी जा सकतीं। इसके बाद सवाल यह उठता है कि क्या टेंपल जैसी सिर्फ निगरानी करने वाली डिवाइस इस दायरे में आती है, क्योंकि आईसीसी के नियमों में टेंपल का नाम लेकर कोई सीधा प्रतिबंध दर्ज नहीं है।
जानकारों का कहना है कि किसी भी डिवाइस के इस्तेमाल के लिए संबंधित नियमों और जरूरी अनुमति का पालन करना होता है, और ब्रांडिंग से जुड़े नियम भी अलग से लागू होते हैं। हालांकि, न तो गिल ने और न ही बीसीसीआई ने अब तक सार्वजनिक रूप से यह बताया है कि यह डिवाइस टीम के आधिकारिक फिटनेस कार्यक्रम का हिस्सा है या उनका निजी प्रयोग है। इसके बाद अब सबकी नजर इस पर है कि आने वाले मैचों में यह डिवाइस फिर नजर आती है या नहीं। इस बीच पहले वनडे की प्लेइंग XI को लेकर भी खूब चर्चा हुई थी, जिस पर आप हमारी पिछली खबर में विस्तार से पढ़ सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए विजडन की इस रिपोर्ट को भी देख सकते हैं।






