भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का NVS-03 लॉन्च देश के नेविगेशन इतिहास का अहम पड़ाव साबित होने वाला है। शुक्रवार 30 अक्टूबर को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा से GSLV Mk II रॉकेट NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचाएगा। यह मिशन भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC को फिर से पूरी ताकत देने के लिए डिजाइन किया गया है। ISRO प्रमुख डॉ. वी नारायणन ने खुद इस तारीख की पुष्टि की है, जिसके बाद अंतरिक्ष प्रेमियों में उत्साह की लहर है।
NVS-03 लॉन्च क्यों है इतना खास?
NavIC को पूरी तरह काम करने के लिए कम से कम चार सक्रिय सैटेलाइटों की जरूरत होती है, लेकिन अभी इस नक्षत्र में सिर्फ तीन ही काम कर रहे हैं। दरअसल जनवरी 2025 में NVS-02 अपने प्रोपल्शन सिस्टम की खराबी के चलते तय कक्षा में नहीं पहुंच सका था, जिससे पूरी प्रणाली कमजोर पड़ गई थी। हालांकि ISRO ने सितंबर 2026 में GSLV Mk II से EOS-05 के सफल लॉन्च के बाद भरोसा जताया है कि वही रॉकेट अब NVS-03 को भी मंजिल तक पहुंचाएगा। यह सैटेलाइट करीब 2,232 किलोग्राम वजनी है और 12 साल तक सेवा देने के लिए डिजाइन किया गया है।
NVS सीरीज़ की यह तीसरी, दूसरी पीढ़ी की सैटेलाइट है, जो IRNSS-1B, IRNSS-1I और NVS-01 के साथ मिलकर NavIC की चार-सैटेलाइट क्षमता पूरी करेगी। इसके बाद भारत को 3D पोजिशनिंग के लिए किसी विदेशी सिस्टम पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वहीं यह सिस्टम भारत के साथ 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में सटीक नेविगेशन देगा। NavIC के दो तरह के सिग्नल होंगे — आम नागरिकों के लिए ओपन सर्विस और सेना जैसी अधिकृत एजेंसियों के लिए प्रतिबंधित सेवा। मिशन की विस्तृत जानकारी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में पढ़ें।
रेलवे से सेना तक — हर जगह बदलेगा खेल
NVS-03 की सफलता का असर रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक हर जगह दिखेगा। रेलवे की रियल-टाइम ट्रैकिंग, पावर ग्रिड का सिंक्रनाइजेशन, आपदा प्रबंधन, मछुआरों के लिए संचार और मोबाइल फोन की लोकेशन सर्विसेज — सब कुछ इस सिस्टम से जुड़ा है। इसके बाद ISRO ने NVS-04 और NVS-05 की भी तैयारी शुरू कर दी है, जिन पर काम अंतिम चरण में है। 2025-26 में दो PSLV असफलताओं के बाद ISRO ने हर लॉन्च पर बेहद सतर्क रुख अपनाया है, और यही सावधानी अब NVS-03 को इतिहास रचने का मौका दे रही है। संबंधित खबर: बांग्लादेश में Starlink Mobile लॉन्च: फोन सीधे सैटेलाइट से जुड़ेगा — भारत में कब आएगी?






