खाते तो हैं सब, पर शरीर तक पहुंचता नहीं पूरा पोषण! 5 शहरों की स्टडी में सामने आई चौंकाने वाली हकीकत

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खाते तो हैं सब, पर शरीर तक पहुंचता नहीं पूरा पोषण! 5 शहरों की स्टडी में सामने आई चौंकाने वाली हकीकत
प्रोटीन और फाइबर: 5 शहरों की स्टडी में बड़ा खुलासा। फोटो: iStock/Whatshot.in और HFE (साभार)

शहरी भारतीयों में पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन प्रोटीन और फाइबर की असल खपत तय मात्रा से काफी पीछे है। ‘द स्टेट ऑफ प्रोटीन एंड फाइबर इन अर्बन इंडिया’ स्टडी में दिल्ली, मुंबई समेत 5 शहरों के 1250 लोगों की खाने की आदतों को परखा गया। नतीजों से साफ हुआ है कि जानकारी और असलियत के बीच बड़ी खाई है।

74 फीसदी लोगों का दावा है कि उन्हें रोज़ की प्रोटीन ज़रूरत का पता है, लेकिन 56 फीसदी सही मात्रा बताने में गलत साबित हुए। दरअसल, जानना और सही समझना दो अलग बातें हैं, और यही इस स्टडी की सबसे बड़ी फाइंडिंग है। वहीं फाइबर के मामले में हालत और भी खराब है — 59 फीसदी ने सही मात्रा जानने का दावा किया, लेकिन सिर्फ 11 फीसदी ही सही जवाब दे पाए। इसके बाद उम्र का फर्क भी दिखा: फाइबर की कमी Gen X में सबसे ज्यादा (65%) मिली।

प्रोटीन और फाइबर की असली खुराक कितनी मिल रही है?

70 फीसदी लोग रोज़ 41 ग्राम से भी कम प्रोटीन खा रहे हैं, जो सिफारिश से काफी नीचे है। 60 फीसदी लोगों ने प्रोटीन वाले खाने की ऊंची कीमत और 57 फीसदी ने सुविधाजनक विकल्पों की कमी को वजह बताया। वहीं पांचों शहरों में प्रोटीन की कमी लगभग एक जैसी मिली, यानी यह समस्या किसी एक शहर की नहीं। दरअसल, दाम और सुविधा दोनों ही सेहत की थाली के आड़े आ रहे हैं।

फाइबर की तस्वीर भी निराशाजनक है: 61 फीसदी लोग तय मात्रा से कम फाइबर खा रहे हैं। 69 फीसदी का कहना है कि सुविधाजनक और भरोसेमंद फाइबर वाले फूड ऑप्शन ही नहीं मिलते। हालांकि अच्छी खबर यह है कि 10 में से 9 लोग चाहते हैं कि प्रोटीन उनकी रोज़ की थाली में आसानी से और प्राकृतिक तरीके से जुड़ जाए। 89 फीसदी को यह परिचित, रोज़ के खाने के रूप में चाहिए।

न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रोटीन को सिर्फ सप्लीमेंट या ट्रेंड के तौर पर नहीं देखना चाहिए। दाल, पनीर, दही, चना, अंडा और सोयाबीन जैसे साधारण भारतीय खाने में प्रोटीन भरपूर मिलता है। इसके बाद फाइबर के लिए ओट्स, ज्वार-बाजरा, हरी सब्जियां और साबुत अनाज सबसे आसान रास्ता हैं। दरअसल, महंगे पैकेट वाले फूड की बजाय रसोई में मौजूद चीज़ें ही असली पोषण देती हैं।

तो अगर आपको भी लगता है कि आप हेल्दी खा रहे हैं, तो एक बार अपनी थाली पर नज़र ज़रूर डालें। नाश्ते में ओट्स या अंकुरित अनाज, खाने के साथ एक कटोरी दही और हर भोजन में हरी सब्जी जैसी छोटी आदतें बड़ा फर्क डाल सकती हैं। सेहत कोई फैशन नहीं, रोज़ का अनुशासन है — और सही जानकारी ही पहला कदम है। यह भी पढ़ें: रोज़ 50 ग्राम फाइबर? ये वायरल हेल्थ ट्रेंड बन सकता है मुसीबत! (रिपोर्ट: NDTV)

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