हाल के वर्षों में बच्चों में मोटापा एक बड़ी चिंता बनकर उभरा है, लेकिन वेल्लोर की एक लंबी रिसर्च ने इससे भी चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) वेल्लोर और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के शोधकर्ताओं ने शहरी गरीब बस्तियों के 251 बच्चों पर जन्म से लेकर 9 साल की उम्र तक नजर रखी, और यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल ‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ – साउथ ईस्ट एशिया’ में प्रकाशित हुआ है। नतीजों से पता चला कि जहां कई बच्चे आज भी कुपोषण से जूझ रहे हैं, वहीं स्कूल जाने की उम्र तक आते-आते मोटापा भी तेजी से पैर पसार रहा है।
बच्चों में मोटापा और कुपोषण: दोहरा बोझ
शोध के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। दो साल की उम्र में करीब 45% बच्चे बौनेपन (स्टंटिंग) से ग्रस्त थे। सात साल की उम्र तक 26.3% बच्चे दुबले पाए गए, जबकि 5.2% अधिक वजन वाले या मोटे थे। नौ साल की उम्र आते-आते दुबलापन 21.6% पर बरकरार रहा, लेकिन अधिक वजन और मोटापा 14.6% तक पहुंच गया — महज दो साल में करीब तीन गुना उछाल। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह बदलाव पांच साल की उम्र के बाद शुरू हुआ था।
विशेषज्ञ इस विरोधाभासी स्थिति को ‘डबल बर्डन ऑफ मालन्यूट्रिशन’ यानी कुपोषण का दोहरा बोझ कहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, यह वह स्थिति है जब एक ही आबादी, परिवार या समुदाय में अल्पपोषण और अतिपोषण दोनों एक साथ मौजूद हों। शोधकर्ताओं के अनुसार, तेजी से बदलती डाइट, जंक फूड और मीठे पेय की बढ़ती खपत तथा कम शारीरिक गतिविधि इस बदलाव के पीछे बड़ी वजह हैं। मां का वजन भी बच्चे की सेहत पर लंबे समय तक असर डालता है।
इस स्टडी का नेतृत्व करने वाली डॉ. बीना कोशी का कहना है कि शहरी गरीब बस्तियों के बच्चे किशोरावस्था से पहले ही दुबलापन और उभरता मोटापा — दोनों का सामना कर रहे हैं। हालांकि यह स्थिति भविष्य में मधुमेह और हृदय रोग का खतरा बढ़ाती है। दरअसल, कुपोषण अब केवल छोटे बच्चों तक सीमित मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे बचपन को घेरने वाली चुनौती बन गया है। इस स्टडी की विस्तृत कवरेज ईटी हेल्थवर्ल्ड पर पढ़ी जा सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि बच्चों को जंक फूड और पैकेटबंद स्नैक्स की जगह घर का बना संतुलित भोजन दिया जाए। रोजाना खेल-कूद का समय निकालना भी उतना ही जरूरी है। मीठे पेय और फास्ट फूड की आदत धीरे-धीरे छुड़ाकर बच्चों को स्वस्थ आदतों की ओर ले जाया जा सकता है। अगर आप सेहतमंद खानपान के नए रुझानों के बारे में जानना चाहते हैं, तो हमारा यह आर्टिकल जरूर पढ़ें — यह आपके बच्चों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।






