मस्क का सनसनीखेज आरोप: ‘ऑलिगार्क्स’ रोक रहे हैं Starlink को — जानिए सरकार का जवाब

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मस्क का सनसनीखेज आरोप: ‘ऑलिगार्क्स’ रोक रहे हैं Starlink को — जानिए सरकार का जवाब
मस्क फोटो: coloradobiz.com | Starlink डिश फोटो: India TV News

स्पेसएक्स प्रमुख एलन मस्क के सनसनीखेज बयान ने भारतीय टेक जगत में हलचल मचा दी है। बुधवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि कुछ ‘ऑलिगार्क्स’ Starlink भारत लॉन्च में अड़ंगा डाल रहे हैं। मस्क के मुताबिक ये ताकतें भारतीय उपभोक्ताओं पर अपनी एकाधिकारवादी पकड़ बनाए रखना चाहती हैं। गौरतलब है कि Starlink पिछले करीब चार साल से भारत में व्यावसायिक अनुमति का इंतजार कर रहा है।

मस्क ने यह टिप्पणी एक पोस्ट के जवाब में की, जिसमें सरकारी आंकड़ों के हवाले से दावा था कि मई 2026 तक देश के 11,256 गांवों में 4G कवरेज नहीं पहुंचा था। उन्होंने लिखा कि ये अड़ंगे भारतीय जनता के खिलाफ एक ‘अपराध’ हैं। हालांकि उन्होंने किसी कंपनी या व्यक्ति का नाम नहीं लिया। दरअसल मस्क का कहना है कि Starlink की सैटेलाइट सेवा ऐसे दूर-दराज़ इलाकों को जोड़ सकती है जहां मोबाइल टावर नहीं पहुंचते।

Starlink भारत लॉन्च पर सरकार का जवाब — आरोप ‘निराधार’

गुरुवार को दूरसंचार मंत्रालय ने मस्क के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि सैटेलाइट इंटरनेट अनुमतियों की प्रक्रिया निष्पक्ष और भेदभाव-रहित है। बयान में ऐसी धारणा को ‘निराधार और भ्रमित’ करार दिया गया। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालय ने बताया कि Starlink, Jio और Airtel की सैटेलाइट उद्यम एक ही नियामकीय चरण में हैं और सभी के सुरक्षा मूल्यांकन जारी हैं।

हालांकि मस्क ने किसी का नाम नहीं लिया, फिर भी संदेह की सूई मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो और सुनील मित्तल की भारती एयरटेल की ओर है। दोनों कंपनियों की सैटेलाइट उद्यमों को शुरुआती मंजूरियां मिल चुकी हैं, लेकिन स्पेक्ट्रम आवंटन और अंतिम अनुमतियां अभी बाकी हैं। वहीं एयरटेल और जियो ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है।

यह टकराव नया नहीं है। इससे पहले मस्क, अंबानी और मित्तल के बीच सैटेलाइट स्पेक्ट्रम देने के तरीके पर तीखी बहस हो चुकी थी। जियो और एयरटेल नीलामी चाहते थे, लेकिन सरकार ने प्रशासनिक आवंटन का रास्ता चुना। इसके बाद 2025 में तीनों ने रंजिश भुलाकर Starlink उपकरणों के वितरण के लिए अलग-अलग समझौते किए थे।

फिलहाल Starlink को GMPCS अनुमति मिल चुकी है और IN-SPACe ने 2025 में इसके पहले चरण के उपग्रह समूह को मंजूरी दे दी थी। लेकिन स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं अभी अधूरी हैं। SpaceX के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने 20 गेटवे साइटें और सैकड़ों एंटेना तैयार कर लिए हैं, और भारतीय यूजर्स का डेटा देश के भीतर ही रखा जाएगा। Deloitte के मुताबिक 2030 तक भारत का सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाजार 1.9 अरब डॉलर का हो जाएगा। तकनीक की और बड़ी खबरों के लिए पढ़ें: घर की दीवार पर 120 इंच का सिनेमा! सिर्फ ₹34,999 में लॉन्च हुआ Lumio Arc 7।

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