दवा खाई फिर भी मौत का खतरा! ICMR की स्टडी में डरावना खुलासा — जानिए कौन सी गलती पड़ रही भारी

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दवा खाई फिर भी मौत का खतरा! ICMR की स्टडी में डरावना खुलासा — जानिए कौन सी गलती पड़ रही भारी
तस्वीरें: Vecteezy.com और Rutgers Health | कोलाज: TheFocusWorld

भारत के अस्पतालों में भर्ती मरीजों पर हुई अब तक की सबसे बड़ी स्टडी ने एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को लेकर डरावना खुलासा किया है। ICMR के वैज्ञानिकों की अगुवाई में 20 बड़े अस्पतालों में किए गए शोध के मुताबिक, जिन मरीजों को दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया का संक्रमण हुआ, उनमें मौत का खतरा सामान्य संक्रमण वालों से कहीं ज्यादा रहा। ये शोध प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The Lancet Regional Health – Southeast Asia में प्रकाशित हुआ है। इसके नतीजे बताते हैं कि आखिरी उम्मीद मानी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाएं भी अब कई मामलों में बेअसर साबित हो रही हैं।

1.6 लाख मरीजों पर क्या मिला

अप्रैल 2022 से अप्रैल 2025 के बीच देश के 20 टर्शियरी केयर अस्पतालों में भर्ती 1,59,336 मरीजों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। इनमें से 26,213 मरीजों (16.4%) में चार खतरनाक ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया — ई. कोलाई, क्लेबसिएला निमोनिया, एसिनेटोबैक्टर बाउमानी और स्यूडोमोनास एरुगिनोसा — का संक्रमण पाया गया। चौंकाने वाली बात ये रही कि इनमें से 61.1% संक्रमण कार्बापेनम एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधी थे; कार्बापेनम को अब तक आखिरी विकल्प की दवा माना जाता रहा है। दरअसल, यही दवाएं गंभीर संक्रमणों में डॉक्टरों का अंतिम हथियार होती हैं, और इनका बेअसर होना इलाज की राह बेहद मुश्किल बना देता है।

प्रतिरोधी संक्रमण में मौत का खतरा कितना ज्यादा

स्टडी में एक ही बैक्टीरिया के प्रतिरोधी और सामान्य रूपों की तुलना की गई। क्लेबसिएला निमोनिया में प्रतिरोधी संक्रमण वालों में मृत्यु दर 31.2% रही, जबकि सामान्य संक्रमण में 23.5%; ई. कोलाई में 24.4% बनाम 17.3% और स्यूडोमोनास में 28.9% बनाम 20.2% रही। वहीं खून के संक्रमण (ब्लडस्ट्रीम इंफेक्शन) में कार्बापेनम-प्रतिरोधी एसिनेटोबैक्टर, स्यूडोमोनास और क्लेबसिएला से मृत्यु दर 46–51% तक पहुंच गई। इसके अलावा प्रतिरोधी संक्रमणों में इलाज का खर्च भी 1.1 से 2 गुना तक ज्यादा आया।

ICMR की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कामिनी वालिया के मुताबिक, “एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस अब दूर का खतरा नहीं रहा — यह पहले से ही भारतीयों की जान ले रहा है।” हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इसका समाधान सिर्फ ज्यादा ताकतवर दवाएं नहीं हैं, बल्कि बेहतर संक्रमण-रोकथाम, समय पर सही जांच और एंटीबायोटिक का जिम्मेदार इस्तेमाल है। विशेषज्ञों की सलाह है कि बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक न लें, दवा का पूरा कोर्स जरूर पूरा करें और अस्पतालों में सफाई-प्रोटोकॉल का पालन करें। संक्रमण से जुड़ी पिछली Lancet स्टडी की तरह ये नतीजे भी बताते हैं कि छोटी सावधानियां ही इस बढ़ते खतरे से बचाव का सबसे बड़ा हथियार हैं। विस्तृत रिपोर्ट NDTV पर पढ़ें।

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